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तालिबानी कैदियों की कथित हत्या की होगी जांच

तालिबानी कैदियों की कथित हत्या की होगी जांच

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जॉर्ज बुश प्रशासन द्वारा वर्ष 2001 में सैकड़ों तालिबान कैदियों की कथित हत्या की जांच में बाधा डालने के आरोपों के तथ्यों का पता लगाने के आदेश दिए हैं।

अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन को दिए एक विशेष साक्षात्कार में ओबामा ने कहा कि इस मामले की जानकारी मुझे अभी हाल में ही हुई है। इसकी ठीक तरीके से जांच नहीं हुई, जिसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए समर्थित अफगान युद्ध का नेतृत्व करने वाले सैन्य कमांडरों पर तालिबान युद्ध बंदियों की हत्या के आरोप लगाए गए हैं।

मैंने अपने सुरक्षा सलाहकार को इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। सुरक्षा सलाहकार वर्ष 2001 में अमेरिका समर्थित उत्तरी गठबंधन के समक्ष आत्मसमर्पण किए कम से कम 1000 तालिबान कैदियों की हत्या के आरोप की जांच करेंगे।

उल्लेखनीय है कि आत्मसमर्पण करने वाले तालिबान के ये लड़ाके अफगनिस्तान में काफी प्रभावशाली माने जाने वाले जनरल अब्दुल रशीद दोस्तम के हिरासत में थे। जनरल दोस्तम तालिबान आतंकवादियों के बाद बनी अफगान सेना में चीफ ऑफ स्टाफ के पद पर भी रहे। अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए आतंवादी हमले के बाद जब अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान पर हमला किया तब जनरल दोस्तम ने अमेरिका का समर्थन किया और तालिबान से युद्ध करने के लिए अमेरिका सैन्य तथा खुफिया एजेंसी सीआईए की मदद प्राप्त की।

ओबामा ने कहा कि मैं समझता हूं युद्ध के समय में भी प्रत्येक देश की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। यदि ऐसा लगता है कि हमारे किसी व्यवहार से युद्ध के नियमों का उल्लंघन हुआ है तो मैं समझता हूं कि हमें उसके बारे में जांच कर उसके बारे में पता लगाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि तालिबान कैदियों की हत्या के आरोप वर्ष 2002 में पहली बार अमेरिकी पत्रिका ‘न्यूज वीक’ ने लगाए थे। पत्रिका ने संयुक्त राष्ट्र के एक दस्तावेज के हवाले से कहा था कि इन आतंकवादियों की कोन्दूज से शेबेरघन बंदीगृह ले जाते समय मौत हो गई थी। उसी समय एक मानवाधिकार गुट के चिकित्सकों ने कहा था कि उन्हें दश्त-ए-लाली के पास सामूहिक कब्रगाह का पता चला है। उन्होंने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा कि इस कब्रगाह में तालिबान कैदियों को दफनाया गया था, जिनकी मौत बंदीगृह ले जाते समय हो गई थी।

इस आरोप के बाद अफगानिस्तान में अमेरिकी जनरल टॉमी फ्रैंक को इन कथित हत्याओं की जांच के आदेश दिए गए थे। लेकिन अमेरिकी अखबार ‘न्यूयार्क टाइम्स’ ने कुछ सरकारी अधिकारियों तथा मानवाधिकार गुटों के हवाले से कहा था कि बुश प्रशासन ने इस मामले की जांच बार-बार हतोत्साहित किया।

ओबामा की इस घोषणा के बाद मानवाधिकार संगठनों के डॉक्टरों के उप निदेशक डाक्टर सुसनाह सिरकीन ने खुशी जताते हुए कहा कि ओबामा प्रशासन की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह इस नरसंहार की पूरी जांच कराएं।

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