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यूं चुनें कंपनी

शनिवार को हमने इक्विटी में निवेश करने के लिए सही कंपनी चुनने के बारे में बात की थी। आज उसी संबंध में कुछ और तथ्य।

- वॉल्यूम कम होने पर उतार-चढ़ाव भी तेज होगा। इसके अलावा इसकी इंपेक्ट लागत भी ज्यादा होगी।

- जानकारी होने की वजह से कंपनी को ट्रेक करने में सुविधा होती है और फैसला जल्दी लेने में मदद मिलती है। ऐसे में किसी कंपनी में निवेश करना आसान हो जाता है, क्योंकि इसमें आप क्यों और किसलिए कर रहे हैं,  इस बारे में आपके पास पुष्ट जानकारी होती है। 

- कभी-कभी कंपनियां शुरुआती अवस्था में इक्विटी मार्केट के मार्फत पैसा एकत्र करती हैं और यह उम्मीद रखती हैं कि बाद में होने वाले फायदे से वह इसकी पूíत कर लेगी।  अच्छा हो कि इन कंपनियों में निवेश न करें।  

- नए प्रोजेक्ट में कई तरह के रेगुलेटरी सत्यापन कराने पड़ते हैं जिनकी वजह से काम में देरी भी हो सकती है। इस वजह से इन कंपनियों के स्टॉक में कभी आश्चर्यजनक परिवर्तन हो सकता है। 

- सुरक्षित यही है कि उन कंपनियों में निवेश करें, जो अपने काम द्वारा फायदा कमा रही हों।

- तेजी से बढ़ती हुई कंपनियां बिना कैश जेनरेट किए फायदा दिखाती हैं। यह कंपनियां विस्तार की अवस्था में होती हैं। अंत में वह कैश जेनरेट करती हैं। 

- जिन कंपनियों का कैश फ्लो निगेटिव होता है, वह अतिरिक्त पूंजी की खोज में होती हैं। वह इसे डेट या इक्विटी द्वारा प्राप्त करने की कोशिश करती हैं। डेट जहां रिस्क को बढ़ाता है, तो इक्विटी आय में तरलता लाती है जिसका असर शेयर के दामों में देखने को मिलता है।

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