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नींद में इलाज करने वाला कांटेक्ट लैंस

अकसर लोगों के मन में कांटेक्ट लैंस की उपयोगिता को लेकर प्रश्न उठते रहते हैं, लेकिन आई-गो लैंस के आने के बाद से लैंस की दुनिया में एक नया बदलाव आया है। लोगों के लिए यह गूढ़ पहेली की तरह है कि क्या कोई ऐसा लैंस बन सकता है, जो दृश्यों को उस दौरान सही करता रहता है, जब आप सो रहे होते हैं।

आई-गो लैंस
आई-गो लैंस आम कांटेक्ट लैंस से बिलकुल अलग हैं। इनकी खासियत ये है कि इन लैंसों को रात में सोते वक्त लगाने के बाद आपको पूरे दिन लैंस की जरूरत नहीं पड़ेगी और आपकी आंखें किसी दृश्य को सामान्य तौर पर ही देख सकेंगी।

आम कांटेक्ट लैंस से अलग
आप किसी ऐसे कांटेक्ट लैंस पहनने वाले व्यक्ति से पूछिए जो रात को इन्हें पहनकर सो गया हो। उसकी पलकें चिपकी हुई होंगी और आखें सुर्ख लाल। पर, जहां तक आई-गो लैंस की बात है, उन्हें रात को पहनकर सोने के बाद सुबह उतार सकते हैं। नए लैंस आपकी आंखों में ऑक्सीजन को प्रवेश करने देते हैं, जिससे आपकी आंखों में सूखापन नहीं रहता। साथ ही ये एपीथीलियम में कोशिकाओं के मूवमेंट को बढ़ावा देते हैं। पूरी रात आपकी आंखों के विजन को करेक्ट करने की इस प्रक्रिया को ‘ऑर्थोकेरेटोलॉजी’ कहते हैं। यह लैंस आम कांटेक्ट लैंस, सजर्री और चश्मा लगाने की तुलना में कई गुना बेहतर हैं।

कोई साइड इफेक्ट नहीं
जब मैं ट्रायल के लिए ऑप्टीशियन कीरन मीनसल से एल. के. लियॉन, सेंट्रल लंदन में मिला, तो मैं ये देखकर आश्चर्यचकित रह गया कि वे ये लैंस क्यों पहने हुए हैं। मीनसल की नजर मुझसे ज्यादा कमजोर है और आई-गो लैंस -5 से कम के दृष्टिदोष को बेहतर नहीं कर पाते और ये लैंस गंभीर एस्टीगेटिज्म की बीमारी में कारगर नहीं हैं। वो कहते हैं कि हाइजीन जरूरी तो है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स नहीं होने चाहिए।

जब मैंने मिनीसल से यह पूछा कि कांटेक्ट लैंसों के मुकाबले यह ज्यादा बेहतर है, तो उनका जवाब हां में था। लेजर सर्जरी की तरह यह स्थाई नहीं होता। अगर आप रात को लैंस पहनना बंद कर देंगे, तो आपकी आंखें खुद को पुन: व्यवस्थित करना शुरू कर देंगी और आपका विजन वैसा हो जएगा, जैसा कुछ दिनों पहले था।

कामयाब तकनीक
जब से ये तकनीक ब्रिटेन में आई है, तब से मिनीसल अब तक 18 लोगों का इस तकनीक द्वारा इलाज कर चुके हैं, लेकिन अमेरिका में अब तक इस टेक्नोलॉजी द्वारा 50,000 लोगों का इलाज किया जा चुका है। लैंस की कीमत 200 यूरो थी और लैंस के चेकअप और समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिमाह 40 यूरो देना पड़ते हैं।

मेरी आंखों की रोशनी की जांच की गई, उसके बाद मिनीसल ने मेरी आंखों का टोपोग्राफी लिया। मेरे कॉíनया का फोटोग्राफ लैंस बनाने के लिए लिया। एक हफ्ते के बाद मिनीसल ने मुझे बताया कि इनको आंखों में कैसे डाला और निकाला जाता है। यह आपके लिए आसान प्रक्रिया होगी, अगर आप कांटेक्ट लैंस का इस्तेमाल करना जानते हैं। उन्होंने मुझे रोजना छह घंटे सोने की सलाह दी और रोजना इन्हें रात को पहनने की हिदायत भी। मुझे इन लैंसों को साफ करने और इन्हें स्टोर करने के लिए सॉल्यूशन भी दिया गया।

शुरुआती दिक्कतें आम
जैसा कि मैंने पहले भी जिक्र किया है कि यह लैंस एकदम से असर नहीं करने वाले। आपको इन लैंसों को पहली बार पहनकर काम करने के बाद 70 प्रतिशत फर्क ही नजर आएगा। ज्यादातर लोगों को दिन ढलते-ढलते इस बात का एहसास होगा कि उनकी रोशनी कम हो रही है। शाम होते-होते मुझें चीजें पहले की अपेक्षा धुंधली दिखने का एहसास हुआ।

मैं ऑप्टीशियन के पास चेकअप के लिए गया। चेकअप के दौरान आई-गो लैंस मेरी आंखों में था। मुझे हर चीज धुंधली दिखाई दे रही थी और मैं इन प्लास्टिक पारगम्य लैंसों को पहनने में असहज महसूस कर रहा था। चेकअप के बाद मैं घर चला गया, लेकिन अभी भी मुझे चीजें धुंधली दिखाई दे रही थीं।

दो रात इन लैंस को पहनने के बाद एकदम से मुझे एहसास हुआ कि मैं बिना लैंस के देख सकता हूं, तकरीबन सबकुछ बेहतर। पर रात में मैंने महसूस किया कि जब मैं कार की प्लेट नंबर को पढ़ रहा था, तो मुझे दिक्कत महसूस हो रही थी। वीकली चेकअप में मिनीसल ने मुझे हेलो इफेक्ट के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लैंस मेरी प्युपिल के केंद्र को करेक्ट करते हैं, वह पेरीफेरी को अलर्ट नहीं करते। मिनीसल ने मुझे बताया कि कुछ मामलों में इन लैंसों को फिट बैठने में चार हफ्तों तक का समय लग जाता है।

मुझे इस बात का बेहद अफसोस है कि शुरुआत में मैंने मिनीसल से यह कहा था कि ये लैंस मेरे लिए ठीक नहीं हैं। लेकिन मिनीसल ने लगातार इस बात पर जोर दिया और अंत में यह साबित कर दिखाया कि यह लैंस कितने कारगर हो सकते हैं।

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  • Web Title:नींद में इलाज करने वाला कांटेक्ट लैंस