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टेलीस्कोप ब्रह्मंड निहारने का रोमांच

जब आप टेलीस्कोप से आकाश में तारों को निहारते हैं, तो सामान्यत: आपको दो तरह के अनुभव होते हैं। पहला, आप आकाश के रोमांचक नजरों को देखकर आश्चर्य में पड़ जाते हैं। टेलीस्कोप से शनि के सुनहरे छल्ले आपको आकाश में काले बटुए में रखी ज्वेलरी की तरह प्रतीत होंगे। दूसरा, आकाश के अद्भुत नजरों को देखने के बाद आपको जल्द ही बड़े टेलीस्कोप की चाह होगी।

चार सौ वर्ष पहले
1609 में गैलीलियो ने रात के समय जब अपने टेलीस्कोप से आसमान को देखा तो उस दिन आकाश से जुड़े कई ऐसे रहस्यों को उजगर कर दिया जिसने विज्ञान की दशा और दिशा दोनों ही बदल दीं। गैलीलियो ने चांद पर पहाड़ व गड्ढों को देखा। हालांकि उस दौरान उम्दा टेलीस्कोप उपलब्ध नहीं थे जो ज्यादा प्रकाश एकत्रित करते, ऐसे में गैलीलियो ने लंबा टेलीस्कोप बनाया, जिसकी छोटी चीजों को बड़ा देखने की क्षमता बेहतर हो और उनमें रंग बेहतर दिखते हों। इस घटना से खगोलशास्त्रियों को लगने लगा कि वह यह पता लगा सकते हैं कि तारे और ग्रह कैसे बनें, आकाशगंगाओं का विकास कैसे हुआ और ब्रह्मंड का आकार क्या है। इसी वर्ष प्राग में रहने वाले एक गणितज्ञ जोहांस कैप्लर ने ग्रहों की गति के नियम दिए थे। रिफ्लेक्टिंग टेलीस्कोप का आविष्कार आइजक न्यूटन ने किया था।

कैसे-कैसे टेलीस्कोप
जोहांस हेवीलियस ने 150 फीट लंबा टेलीस्कोप बनाया था, जिसको एक खंभे में रस्सियों द्वारा बांधा गया था। यह टेलीस्कोप थोड़ी सी हवा चलने पर हिलने लगता था। नीदरलैंड में हाइजीन भाइयों ने एक लंबा टेलीस्कोप बनाया, जिसमें ट्यूब नहीं लगे हुए थे। रिफ्लेक्टिंग टेलीस्कोप के पुरोधा के तौर पर आइजक न्यूटन को जाना जाता है। विलियम हर्शल ने हाथ द्वारा निíमत टेलीस्कोप से ही यूरेनस ग्रह की खोज की थी।

वर्तमान के सबसे बड़े टेलीस्कोप के शीशों का व्यास 33 फीट है। आज के तीन बड़े हैं टेलीस्कोप जेमिनी नॉर्थ, सुबारू और केक।  8.1 मीटर का जेमिनी टेलीस्कोप प्याज के आकार का चांदी का गुंबज है। बंद करने पर यह टेलीस्कोप ऐसा लगता है, जसे किसी मोटे व्यक्ति को एक टच्यूब में बंद कर दिया गया हो।

जेमिनी के चार डिजिटल डिटेक्टर, कैमरा और स्पैक्ट्रोमीटर, कार जितने भारी हैं और इनकी कीमत तकरीबन पांच मिलियन डॉलर है। जहां तक सुबारू टेलीस्कोप की बात है, तो इतना बड़ा टेलीस्कोप आपने शायद ही कभी देखा हो। 1999 में जब इस टेलीस्कोप का उद्घाटन किया गया था, तब इस टेलीस्कोप में एक आईपीस लगा दी गई थी, ताकि जपान की राजकुमारी उसके द्वारा देख सके। केक में एक जसे दो टेलीस्कोप हैं, दोनों के शीशे दस मीटर के हैं जिसमें 36 सेगमेंट हैं। प्रत्येक सेगमेंट का वजन हजार पाउंड और कीमत कई मिलियन डॉलर।

इस वर्ष ही हब्बल टेलीस्कोप भी अपने पांचवें और अंतिम मिशन के लिए तैयार हो जाएगा जिसे 12 मई को प्रक्षेपित किया जाना है।  2014 में नासा की हब्बल के उत्तराधिकारी के तौर पर जेम्स वेब टेलीस्कोप को छोड़े जाने की योजना है। जेम्स वेब टेलीस्कोप वहीं से अपने अभियान की शुरुआत करेगा, जहां से हब्बल काम छोड़ेगा।

गैलीलियोस्कोप
अंतर्राष्ट्रीय एस्ट्रोनॉमी वर्ष के प्रोजेक्ट डाइरेक्टर स्टीफेन पोंपिया और उनकी टीम ने सबसे सस्ता टेलीस्कोप बनाया है। इसकी कीमत मात्र 10 डॉलर है। इसका नाम गैलीलियो की 400वीं सालगिरह के अवसर पर गैलीलियोस्कोप रखा गया है। गैलीलियो ने पहली बार जूपिटर का चक्कर लगाते चार चंद्रमा देखे थे और यह दिखाया था कि शुक्र सूर्य का चक्कर लगाता है। पोंपिया इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि आयोजनकर्ता एक मिलियन लोग तक पहुंच सकेंगे। जहिर है गैलीलियोस्कोप से वैज्ञानिक गैलीलियो के सत्रहवीं शताब्दी के टेलीस्कोप की तुलना में कहीं बेहतर तरीके से देख पाएंगे।

टेलीस्कोप के बारे में अनसुनी बातें

-25 सितंबर, 1608 को हैंस ने टेलीस्कोप खोज था।

-शुरुआती दौर में टेलीस्कोप का उपयोग व्यापारी करते थे। टेलीस्कोप के माध्यम से वह इस बात का पता लगाते थे कि समुद्र में व्यापरियों का जहाज कितनी दूरी पर है। ताकि वह अपने प्रतिद्वंद्वी को व्यापार में पछाड़ सकें।

-टेलीस्कोप ने हाई स्पीड कम्युनिकेशन नेटवर्क को जन्म दिया। मीलों दूर से सिग्नल देने के लिए टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया जाता था।

-गैलीलियो ने ही पहली बार टेलीस्कोप के माध्यम से आकाश को देखा था। गैलीलियो ने ही जूपिटर की खोज की थी और चांद पर गड्ढे देखे थे। लेकिन जब उन्होंने इस टेलीस्कोप के माध्यम से सूर्य को देखने की कोशिश की तो बाद में यही उनकी अंधता का कारण बना।

-आयरलैंड के रूज ने 1845 में पहली बार 40 टन का परावर्तक टेलीस्कोप बनाया जो सात दशकों तक विश्व का सबसे बड़ा टेलीस्कोप रहा।

-हुकर टेलीस्कोप ने पहली बार दूसरी गैलेक्सी के अस्तित्व की बात साबित की और बताया कि ब्रह्मंड सिकुड़
रहा है।

-नासा ने 1990 में हब्बल टेलीस्कोप लांच किया। इसका बजट 2 बिलियन डॉलर था।

-हब्बल टेलीस्कोप  के आठ फुट हल्के शीशों को लगातार एक वर्ष तक चमकाया गया ताकि दस नैनोमीटर तक की दूरी को नापने में किसी तरह की कोई त्रुटि न हो। लेकिन जिन लोगों को शीशों को चमकाने का काम किया गया था, वह इसे गलत तरीके से कर बैठे।

-गामा रे टेलीस्कोप ब्रह्मंड के बड़े विस्फोटों को सही तरीके से देखने में सक्षम माना जाता है।

-1960 में भौतिक विज्ञानी रेमंड डेविस जूनियर ने टेलीस्कोप में एक लाख गैलन ड्राइ क्लीनिंग द्रव्य का इस्तेमाल किया था। उम्मीद है कि नवंबर के मध्य में ल्यूनिड उल्का की बौछार  हो सकती है। 

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