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दक्षिण दिल्ली के जमरूदपुर में निर्माणाधीन मेट्रो के पिलर के ढ़हने के बाद उसके ऊपर से एक सेगमेंट गिर जने से एक साइट इंजीनियर सहित छह मजदूरों की मौत हो गई जबकि 16 अन्य घायल हो गए। दिल्ली मेट्रो के पिछले ग्यारह साल के इतिहास में यह सबसे बड़ा हादसा है। इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक डा. ई. श्रीधरन ने इस्तीफा दे दिया है। हादसे की जंच के लिए मेट्रो ने एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने और मृतकों के परिजनों व घायलों को मुआवज देने की घोषणा की है।
केंद्रीय सचिवालय से बदरपुर लाइन पर मूलचंद के बाद जमरूदपुर गांव के पास यह हादसा तड़के लगभग पांच बजे तब हुआ जब वहां पर पिलर पर सेगमेंट डालने का काम चल रहा था। पिलर के ऊपर और नीचे निर्माण कम्पनी के 30 मजदूर काम कर रहे थे। पिलर नम्बर 67 का ऊपरी हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया जिससे पिलर नम्बर 66 व  67 के ऊपर रखे पूरे सेगमेंट  गिर गए। एक जोरदार धमाका हुआ और आसपास की धरती कांप गई। सेगमेंट जमीन के नीचे कई फीट नीचे धंस गया। इस हादसे में भूमिगत पाइपलाइन फट गई जिससे वहां पर पानी भर गया। एहतियात के तौर पर पूरे इलाके की बिजली काट दी गई। आसपास के घरों को खाली करा दिया गया।

वहां काम कर रहे 30 कर्मियों में 20 हादसे की चपेट में आ गए। 15 को एम्स के ट्रामा सेंटर में, दो को मूलचंद और एक को सफदरजंग में भर्ती कराया गया। ट्रामा सेंटर में तीन को मृत घोषित कर दिया गया जबकि दो की हालत गंभीर बनी हुई है। भारी भरकम सेगमेंट के कारण तीन के अलावा चार मजदूरों के शवों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

मुख्यमंत्री शीला दीक्षित घायलों का हालचाल पूछने के लिए ट्रामा सेंटर गई और हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन ने घटना की जंच के लिए एक पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। मेट्रो की ओर से मृतक के परिजनों को पांच-पांच  लाख रुपए, गंभीर रूप से घायलों को दो-दो लाख रुपए और मामूली रूप से घायलों को 50 हजर रुपए मुआवज देने की घोषणा की है।

इस भीषण हादसे का अंदाज इसी से लगाया ज सकता है कि दिन भर मलवे हटाने का काम चलता रहा। 250 टन क्षमता की छह और 400 टन क्षमता की एक क्रेन लगानी पड़ी। दिल्ली पुलिस और सिविल डिफेंस के अलावा मेट्रो  के सौ से अधिक इंजीनियर राहत कार्य में जुटे रहे। दुर्घटनास्थल के आसपास के तमाम रास्तों को बंद कर दिया गया जिनके सोमवार सुबह खोले जने की संभावना है।

मेट्रो के लिए काम करने और आसपास के लोगों ने आरोप लगाया है कि पिलर में दरार की कई बार शिकायतें की गई थीं लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और आखिरकार जनलेवा हादसा हो गया। 

 

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  • Web Title:फिर मेट्रो का पिलर गिरा, छह मरे