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गरीब कम करने हैं तो गरीबी का पैमाने सख्त कर दो! माया राज में जसे यही कहानी दोहराई ज रही है। सरकारी घर तो बनवा दिए गए मगर उनको बांटने के लिए गरीब नहीं मिल रहे। दरअसल, गरीबी की कसौटी पर खरा उतरने को इतने कड़े नियम बनाए गए हैं कि गरीबों की हजरों की भीड़ भी कम पड़ गई है। कांशीराम प्रोजक्ट में गाजियाबाद शहर के अंदर 15 सौ सरकारी आवास बनवाए गए हैं, मगर इनके लिए प्रशासन महीनों की कवायद के बाद भी सिर्फ सवा तीन सौ पात्र लोग ढूढ़ पाया है।

सरकारी घर बांटने को गरीब नहीं मिल रहे, तो इसके पीछे शासन द्वारा बनाए गए नियम हैं। दरअसल, कांशीराम आवास देने के लिए ऐसी व्यवस्था तय की गई है, जिसमें अफसर उलझकर रह गए हैं। नियम बनाया है कि सिर्फ वही गरीब आवेदन कर सकते हैं, जिनके पास बीपीएल कार्ड हो। सवाल यह उठता है कि 50 लाख की आबादी छू रहे गाजियाबाद जिले में गरीबों के लिए बीपीएल कार्ड बनाने में प्रशासन ने पहले ही बहुत कंजूसी बरती है। सिर्फ 24 हजर कार्ड जरी किए गए। मतलब साफ है, हजरों गरीबों को जनबूझकर नजरंदाज कर दिया गया।

कांशीराम योजना के घर पाने को शहर क्षेत्र में रहने की बंदिश भी शामिल है। गाजियाबाद शहर में दो हजर के करीब ही बीपीएल कार्ड बने हैं, बाकी सब कार्डधारी देहात में रहते हैं। सिर्फ इतना होता तो 15 सौ आवास के लिए दो हजर कार्डधारियों में से छंटनी कर भी ली जती।

पाबंदियां अभी और भी हैं, जिनकी वजह से पूरा अमला मुश्किल में फंसा है। मसलन, पहली वरीयता निराÞिात विकलांग, निराÞिात विधवा को दी जएगी। जरूरी यह भी होगा कि उनका पूरा कुनबे के पास अपना मकान न हो। जसे, यदि बेटे ने मकान बनवा लिया है तो विधवा मां को सरकारी घर देने पर विचार नहीं किया जएगा। जंच में अफसर ऐसी विधवाओं को भी नकार दे रहे हैं, जिनको उनके बेटे-बहू साथ नहीं रखते। यही हालत विकलांगों की भी है।

 सरकारी घर पाने को प्रशासन के पास हजरों लोगों ने आवेदन किए हैं मगर अफसरों का कहना है कि सिर्फ सवा तीन सौ नाम ही पात्रता के पैमाने पर खरे उतरते दिखाई दे रहे हैं। जून के आखिरी सप्ताह तक तैयार मकानों का आबंटन किया जना था मगर जुलाई शुरू होने के बाद भी अभी प्रशासन गरीबों के नाम तय नहीं कर पाया है। एडीएम सिटी एसके Þाीवास्तव बताते हैं कि अभी घर दिए जने के लिए पर्याप्त नाम नहीं मिल सके हैं। आवेदन तो हजरों की संख्या में हैं। छंटनी का काम जरी है।

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  • Web Title:गरीब ही नहीं मिल रहे, घर किसे बांटें