class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अब सरकारी स्कूलों के दिन जल्द ही फिरने वाले हैं। क्योंकि फीस बढ़ोत्तरी के बाद शासन सरकारी स्कूलों के गिरते स्तर में सुधार लाने के लिए नया ऐजुकेशन कोड लागू करने की तैयारी में है। इसके मौजूदा शिक्षण प्रणाली में अमूल चूल परिवर्तन किया जा रहा है।

डीआईओएस ज्योति प्रसाद के अनुसार शिक्षा प्रणाली में अमूल चूल परिवर्तन में स्कूलों का अपग्रेडशन,क्वालिटी चेकिंग,टीचरों का  मासिक परफोरमेंस, शिक्षा अधिकारियों द्वारा स्कूलों का औचक निरीक्षण, कक्षा लगने के यूनीफार्म टाइम टेबुल,ड्रेस कोड आदि शामिल किए गए हैं।

इसे नया ऐजुकेशन कोड के रुप में चालू शक्षणिक सत्र से ही लागू करने पर जोर दिया ज रहा है। शिक्षा प्रणाली में फेरबदल के अनुरुप ही जिले के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों का हाल में सव्रे कराया गया। सव्रे की रिपोर्ट के अनुसार पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले बेसिक शिक्षा परिषद् के सभी 86 स्कूलों को माध्यमिक शिक्षा परिषद में शामिल करने की सिफारिश की गई है। डीएसओ ज्योति प्रसाद के अनुसार नए शक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूलों के कायापलट में नए ऐजुकेशन कोड की भूमिका अहम होगी। नए एजुकेशन कोड में  निजी स्कूलों की तरह शिक्षा की गुणवत्ता पर खरा उतरने के लिए कंट्रेक्ट पर भी टीचर रखने की प्लानिंग है। नए ऐजुकेशन कोड के लागू होने से सालों से एक ही स्कूल में जमे अथवा क्लास लेने से कतराने वाले शिक्षकों के वर्किंग में सुधार होगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. धर्मवीर सिंह के अनुसार सरकारी स्कूलों के गिरते स्तर के लिए मौजूद शिक्षा प्रणाली में अमूल चूल परिवर्तन पर जोर दिया गया। नए ऐजुकेशन कोड में स्कूलों की रेंडम चेकिंग और टीचर्स-स्टूडेंटस परफोरमेंस को नियमित करने के लिए एक कोर कमेटी के गठन की सिफारिश की गई है। यह कोर कमेटी डीएम की अध्यक्षता में स्कूलों की क्वालिटी चेकिंग की साप्ताहिक समीक्षा करेगी। बताया जता है कि विश्व बैंक का डंडा चलने के बाद ही शासन को प्राइमरी,जूनियर और सीनियर स्कूलों की क्वालिटी मोनिटरिंग के लिए कुछ ठोस कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। क्योंकि सूत्रों की मानें तो सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर लाखों  के फंड लेने के बाद भी सरकारी स्कूलों का कायापलट नहीं हो पाया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सरकारी स्कूलों का होगा कायापलट