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डाक्टरों ने अपने ऊपर लगातार हो रहे हमले का ठीकरा सरकार पर फोड़ दिया है। मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में रविवार को डा. जमालुद्दीन की पिटाई से आक्रोशित डाक्टरों ने सरकार ने तुरंत कार्रवाई की मांग की है। डाक्टरों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी, अल्प सुविधाएं और ब्लड बैंक नहीं होने का खामियाजा वे भुगत रहे हैं। आये दिन डाक्टरों की पिटाई हो रही है पर सरकार खामोश है। बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने कहा है कि सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर अब सूबे के डाक्टर चुप नहीं बैठेंगे। मार्च से अब तक सूबे के आठ डाक्टर पर हमले हो चुके हैं पर एक भी दोषी पकड़ा नहीं गया है। दो सालों से डाक्टर अपनी सुरक्षा को लेकर अन्य राज्यों की तरह यहां भी हेल्थ प्रोफेशनल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग कर रहे हैं। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री चन्द्रमोहन राय ने डाक्टरों के साथ हुए समझोते के समय स्पष्ट कहा था कि वे तुरंत इस एक्ट को लागू करने की कार्रवाई करेंगे। पर पिछले वर्ष फरवरी में हुए समझोते का अब तक पालन नहीं हुआ है।

इस बीच कोसी के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों समेत पूरे सूबे में दर्जन से ऊपर डाक्टरों पर हमले हुए हैं। इधर हाल के दिनों में पूर्णिया में विकलांग डा. संजय साह, सुपौल के बसन्तपुर में डा. शैलेन्द्र कुमार गुप्ता, सुपौल सदर अस्पताल में डा. नूतन वर्मा, महाराजगंज में डा. रामनरेश सिंह, बांका सिविल सर्जन डा. विनोद सिन्हा, अररिया सिविल सर्जन डा. गवेन्द्र कुमार, मढ़ौरा में डा. ललन सिंह, बेगूसराय में डा. एके चौधरी और मधुबनी में डा. बीके झ पर हमला हुआ है। भासा के संयुक्त सचिव डा. कुमार अरुण और प्रवक्ता डा. रणजीत कुमार ने कहा है कि सरकार की उदासीनता के खिलाफ 19 जुलाई को भासा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में आंदोलन की तिथि का एलान किया जाएगा।

 

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  • Web Title:डाक्टरों ने हमले का ठीकरा सरकार पर फोड़ा