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कालेजों की सम्बद्धता के बाद महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के  प्रशासनिक ढांचे में फेरबदल के आसार हैं। विश्वविद्यालय में संकायों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। कुछ संकायों का विभाजन भी हो सकता है। परिनियमावली के निर्माण में इस प्रस्ताव पर गंभीरता से मंथन हो रहा है। कुछ दिनों हुई पहले हुई एकेडमिक काउंसिल में इस मुद्दे पर अनौपचारिक रूप से चर्चा हुई। काशी विद्यापीठ में इस समय नौ संकाय हैं-मानविकी संकाय, समाज विज्ञान संकाय, विज्ञान संकाय, वाणिज्य संकाय, समाजकार्य संकाय, शिक्षाशास्त्र संकाय, विधि संकाय, चिकित्सा विज्ञान संकाय और पत्रकारिता संस्थान शामिल हैं। इसमें मानविकी संकाय सबसे बड़ा है, जिसमें 9 विभाग हैं।

सूत्रों के अनुसार मानविकी संकाय के विभाजन कर एक और संकाय बनाने का प्रस्ताव है। नए बनने वाले संकाय में कौन-कौन से विभाग शामिल किए जएंगी। इस पर माथापच्ची चल रही है। कुछ विभागों को यह पसंद नहीं है कि वह मानविकी संकाय से बाहर जएं। वहीं कई ऐसे संकाय है, जो काफी छोटे हैं और इनमें एक-एक विभाग हैं। शिक्षा शास्त्र संकाय में सिर्फ शिक्षा विभाग है। विधि संकाय में सिर्फ विधि विभाग है। यह माना ज रहा है कि कालेजों के जुड़ने के बाद कृषि संकाय का भी गठन किया जएगा। विश्वविद्यालय परिसर में कृषि की पढ़ाई नहीं होती है, लेकिन कालेजों में होती है। कुछ संकायों का पुनर्गठन भी हो सकता है।

हालांकि संकायों के पुनर्गठन की बात पहले भी उठती रही है, लेकिन कभी गंभीरता से इसे नहीं लिया गया। अब परिनियमावली के संशोधन के बहाने इस मुद्दे पर फिर से चर्चा होगी। वास्तविक स्थिति परिनियमावली के निर्माण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

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  • Web Title:विद्यापीठ में संकायों की संख्या बढ़ने के आसार