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बारिश का स्वागत

वर्षा के स्वागत  के सबके अपने तरीके हैं। हमारे शहर के हर समृद्ध इलाके के अगल-बगल एक जी. जी. (गंवई गंवार) बस्ती है। हर चुनाव के बाद चुने जन सेवक याने जन-जुगाड़ उनका सफाया करवाते हैं और हर बार चुनाव के पहले यह बदस्तूर आबाद हो जाती हैं। जहिर है कि शहर के पढ़े-लिखों से उलट, इन गंवई-गंवारों की जिजीविषा गजब की है। यह शहर में रहते हैं तो बस, उस कूड़े-करकट के मानिन्द जो हर रईस घर के आस-पास, इफरात से बिखरा है।

तभी तो बारिश आई नहीं कि कोयल की नकल में इनका कजरी और बारहमासी का बेसुरा राग शुरू हो जता है। जाने कैसे सख्त जान हैं ये! इनके बच्चे बरसते पानी में जानबूझ कर भीगते हैं। कम्बख्तों को इतना भी नहीं पता है कि नंग-धड़ंग होने के लिए शहर की सड़क सर्वथा अनुचित जगह है। इसके लिए हर पांच सितारा होटल में स्विमिंग पूल बने हैं। इतना ही नहीं बचे-खुचे पेड़ों को भी नहीं बख्शते हैं जी. जी.। इन्हें ज्ञान-सलीका तो है ही नहीं। पेड़ से दो-दो रस्सी लटकाकर और बीच में पटिया बांधकर कोई झूला बनाता है क्या? तभी तो कोठी बंगले वाले फरमाते हैं कि इनकी मति मारी गई है। इतनी बार टांग-वांग टूटी है, फिर भी अक्ल नहीं आती है।

यों समृद्ध समझदार हैं। फालतू भीगने-शीगने की रिस्क नहीं लेते हैं। एक नहीं, उनके यहां दो झूले हैं, एक ड्रॉइंग रूम में, दूसरा लॉन में। जिसका मन करे, इन पर झूले। इनको तो स्वच्छ वातावरण का इतना ख्याल है कि आवास की गंदगी भी वह सामने नहीं, चौराहे पर, फिंकवाते हैं। इनकी बेहद निजी गोपनीय गन्दगी के लिए घर के बेशकीमती महंगे विदेशी कारपेट हैं। इन का खुफिया कूड़ा-करकट कालीनों के नीचे दफन है। सरकार की आंखों पर नियमित चंदे-चढ़ाने की पट्टी है, मेहमान कारपेट सराहते नहीं अघाते हैं।

इनकी रवायत यह है कि हाकिम हो या कुदरत का करिश्मा सबका स्वागत शानदार पार्टी से करते हैं। अफसर रूखा है तो विदेशी दारू और पकवान वरना संगीत और कविता। वर्षा हिया और प्रिया का भी मौसम है। उनके पास इसका भी चौचक इंतजम है। घर में बीवी-बच्चों का खतरा है। बारिश, अफसर, गीत-संगीत, काव्य-पाठ वगैरह शाकाहारी हरकतों के लिए घर है, सामिष के खातिर फार्म-हाउस। बारिश का स्वागत गांव वाले धूम-धाम से करते हैं। उन गरीबों की तो रोजी-रोटी का सवाल है। किसानों के अलावा इस मुल्क में ठेकेदार, इंजीनियर, डॉक्टर, अफसर भी बसते हैं। वह भी उल्लासरत हैं। कमाई-कमीशन का इससे मुफीद मौका कहां मिलेगा?

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