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बजट से मिली निराशा के कारण गिरे शेयर बाजार

बजट में अपेक्षित आर्थिक सुधारों के संबंध में घोषणाओं के अभाव में निवेशकों में हताशा का मौहाल दिखा तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों की बाजार से धन निकासी के कारण 11 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान शेयर बाजरों में गिरावट आई। सकारात्मक और नकारात्मक घटनाक्रमों के बीच पूरे सप्ताह में बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला लेकिन बाजार की मुख्य उत्प्रेरक शक्ति विदेशी संस्थागत निवेशकों की धन निकासी ने कारोबार के रुख को नकारात्मक दिशा में मोड़ दिया।

बंबई शेयर बाजर में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान निवेशकों की बजट के प्रति निराशा के कारण समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान बंबई सेंसेक्स और निफ्टी में नौ प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट आई। निवेशकों को बजट से आर्थिक सुधारों के संदर्भ में भारी उम्मीदें थीं। बाजार के लड़खड़ाने का एक अन्य प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा बाजार से लगातार हाथ खींचे रखना था। एफआईआई के बीच इस बात को लेकर आशंका बढ़ रही है कि स्टैंडर्ड एंड पूअर्स सहित प्रमुख साख निर्धारक एजेंसियां भारत की साख दर को घटा सकती हैं।

समीक्षाधीन सप्ताह में बंबई शेयर बाजर का 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स पिछले सप्ताहांत के बंद भाव की तुलना में 9.45 प्रतिशत अथवा 1408.83 अंकों की गिरावट के साथ आठ सप्ताह के निम्नतम स्तर 13,504.22 अंक पर बंद हुआ। इसी प्रकार, नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 420.35 अंक अथवा 9.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ सप्ताहांत में 4,003.90 अंक पर बंद हुआ। बजट में महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों के अभाव में निवेशकों में निराशा का वातावरण रहा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009-10 में राजकोषीय घाटा बढ़कर 6.8 प्रतिशत हो गया।

इस बीच, प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस टेक्नोलाजी ने उम्मीद से बेहतर पहली तिमाही का कार्यपरिणामों की घोषणा की और बाजार के इसके संचयी शुद्ध मुनाफे में कमी आने के अनुमानों को धराशायी कर दिया। भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखाई दिए जहां मई में उसके उद्योग के क्षेत्र में 2.7 प्रतिशत तथा विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में 2.5 प्रतिशत की वद्धि हुई। प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार एफआईआई ने सप्ताह के दौरान 4,681.30 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की विकास भविष्यवाणी को वर्ष 2009 के लिए 5.4 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जबकि विश्व अर्थव्यवस्था के 1.4 प्रतिशत तक सिकुड़ने का अनुमान व्यक्त किया गया।


बाजार विश्लेषकों ने कहा कि निगमित कंपनियों के पहली तिमाही के कार्यपरिणामों के जारी होने के बाद बाजार को दिशा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि बाजार में अत्याधिक बिकवाली हो चुकी है तथा कोई भी सकारात्मक कदम के कारण भारी मात्रा में शार्ट कवरिंग गतिविधियां हो सकती है। कलकत्ता शेयर बाजार में समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान बिकवाली दवाब के कारण भारी गिरावट आई और बजट भी बाजार में कोई नई जान फूंकने में नाकामयाब रहा। चालीस शेयरों पर आधारित कलकत्ता सेंसेक्स सप्ताहांत में 544.88 अंकों की गिरावट दर्शाता 6,119.23 अंक पर बंद हुआ।

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