class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हम यहां,तुम वहां

हम यहां,तुम वहां

करियर को लेकर बढती महत्वाकांक्षाओं व विस्तार ने जहां एक ओर अवसरों के अनंत आकाश खोल दिए हैं, वहीं रिश्तों पर भी असर डाला है। एक जमाना था जब पत्नी पति और परिवार के साथ के लिए जॉब तुरंत छोड़ देती थी। पोस्टिंग किसी दूसरे शहर हो गई तो झट से नौकरी छोड़ दी। अगर पति का ट्रांसफर हुआ तो एक बार भी उसके मन में यह खयाल नहीं आता था कि उसके करियर का क्या होगा। लेकिन अब युवा प्रोफेशनल न तो अकेले दूसरे शहर में जाकर रहने की बात को लेकर चिंतित होते हैं, न ही महिलाएं पति की वजह से अपने करियर को दांव पर लगाती हैं। आज के दौर में अच्छे लाइफ स्टाइल को मेन्टेन रखने के लिए पति-पत्नी दोनों का काम करना जरूरी है। यही वजह है कि लाँग डिस्टेंस मैरिज की अवधारणा अब तो न हैरानी में डालती है, न ही सुनने में अजीब लगती है।

शिल्पा एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीईओ हैं और उनके पति आईएएस अफसर। वह कहती हैं, ‘आज के प्रतिस्पर्धा के दौर में आपको राह में आने वाले हर अवसर को पकड़ना पड़ता है। औरत अपनी एक पहचान बनाना चाहती है और साथ ही अपनी काबिलियत भी सिद्ध करना चाहती है। फिर अगर दोनों पति-पत्नी कमा कर अपने गैराज में एस्कोडा रखना और छुट्टियां थाईलैंड में बिताना चाहते हैं तो इसमें बुराई ही क्या है। मैं और मेरे पति शादी के एक महीने से दूर रह रहे हैं। अभी हम बच्चा नहीं चाहते और इस व्यवस्था में हम बेहद खुश हैं। जब भी मिलने का दिल करता है फ्लाइट पकड़कर मिलने चले जाते हैं। मैं अपनी देखभाल स्वयं कर सकती हूं इसलिए मनीष के पास न होने की कमी कभी खली नहीं। शायद व्यस्तता भी इसकी वजह हो सकती है।

अगर ये युगल तमाम विपरीत परिस्थितियों में भी इस तरह के विवाह को निभा पा रहे हैं तो उसकी वजह है एक-दूसरे को समझने का भाव। वे जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जी रहे हैं। अंगुलियों को की-बोर्ड पर रखते ही ई-मेल की सुविधा, मोबाइल फोन या वैब कैम में एक-दूसरे को देखने के सुख ने लाँग डिस्टेंस मैरिज को कायम रखना थोड़ा आसान बना दिया है। तकनीकी विकास ने दूरियों को कम करने में मदद की है।

साथी की अनुपस्थिति से उपजी शारीरिक दूरी व जरूरत पडम्ने पर मन की बातें शेयर न कर पाने की कसक.. अकेलापन व तकलीफ में साथी का साथ न पाने का दर्द.. क्या यह कमी फोन पर बात करके पूरी की जा सकती है? दरअसल यह रिश्ता आपसी सम्मान, विश्वास, वचनबद्धता और प्यार पर आधारित होता है। शायद यही वजह है कि इस तरह के विवाहों में शारीरिक संबंध न बन पाने या महीनों बाद मुलाकात होने जैसी चुनौतियों के बावजूद पति या पत्नी को अपने साथी के विवाहेत्तर संबंधों की आशंका बिल्कुल नहीं होती।

कुछ समाजविज्ञानी तो यहां तक कहते हैं कि दूर रहने वाले युगलों के बीच ज्यादा खुला संवाद होता है और वे ज्यादा बेहतर ढंग से एक-दूसरे से अपनी दिल की बात कह पाते हैं। वे इस दूरी का भी सदुपयोग करते हैं जो उनके बीच प्यार ही बढती है और तकरार की संभावना तो पास वाले से ही ज्यादा होती है। ऐसे युगल जब मिलते हैं तो उनके पास साथ गुजारने को बहुत सारा वक्त नहीं होता, इसलिए जो भी वक्त मिलता है उसे वे नजदीकी बढने में गुजारते हैं। झगड़े करने का सवाल ही कहां उठता है?

इंटरनेट बढ़ा सकता है घनिष्ठता
चूंकि ऐसे विवाह में शारीरिक रूप से नजदीकी नहीं होती है इसलिए प्रभावी संवाद की जरूरत बढ़ा जाती है। जब युगल साथ रहते हैं तो स्पर्श, आंखों के इशारे या होंठों पर यूं ही आने वाली मुस्कान संवाद बनाए रखने के साथ सुरक्षा व राहत का एहसास भी दिलाए रखती है। संवेगात्मक रिक्तता को भरने व संबंध को मजबूत बनाए रखने के लिए युगल को रोज ही फोन पर बात या नेट पर चैटिंग करनी चाहिए। रही अविश्वास या साथी को धोखा देने की बात है, तो यह तो आपके पार्टनर के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है। वरना साथ रहने वाले कपल्स भी तो कभी-कभी वफादारी नहीं निभाते। यहां निष्ठा व विश्वास का भाव बहुत मायने रखता है।

महीने-दो महीने में जरूर मिलें
किसी भी रिश्ते को सहज व सही ढंग से विकसित होने के लिए आपसी देखभाल, विश्वास, जिम्मेदारियों को निभाने की भावना व साथी की भावनाओं को समझने की जरूरत होती है। इन्हें नजरंदाज किया तो लाँग डिस्टेंस मैरिज में स्थितियां ज्यादा विकट हो सकती हैं। कई बार युगल दूर होने की वजह से अपनी भावनाएं या प्यार ठीक तरह से व्यक्त नहीं कर पाते हैं। शारीरिक घनिष्ठता का अभाव भी उनकी बात कह नहीं पाता है। वरना छू भर लेने से भी बहुत कुछ अनकहा व्यक्त हो जाता है। साथी से लंबे समय तक दूरी से अकेलापन, चिड़चिड़ापन, तनाव व खुद को असहाय समझने की भावना समा जाती है।

बच्चे प्रभावित होते हैं
डॉ। दीपक केम समाजशास्त्री
इस तरह के विवाह में परिवार के ढांचे पर बुरी तरह से असर पड़ता है और बच्चों की जिंदगी एक तरह से अस्तव्यस्त हो जाती है। मां और पिता का साथ जो उसे पूर्णता में मिलना चाहिए वह टुकड़े-टुकड़े में मिलता है। प्राय ऐसी स्थितियों में बच्चे मां के साथ ही रहते हैं और पिता से उनकी भेंट महीने में एक बार ही हो पाती है। उस छोटी से मुलाकात में जाहिर है कि वे महीने भर की बातें नहीं बांट सकते हैं। कहीं न कहीं उनके बीच एक दूरी अवश्य व्याप्त हो जाती है। परिवार एक इकाई है, यह बात वे समझ नहीं पाते तथा भावनात्मक रूप से मजबूती न पाने की वजह से वे बिगडम्ते जल्दी हैं और उनके अंदर स्वार्थ की भावना भी किसी हद तक विकसित हो जाती है।

चारू व विशाल गर्ग
भरोसा ही तो है रिश्ते की जड़
इस युगल की शादी हुए छह वर्ष हो चुके हैं। पिछले छह महीनों से विशाल बेंगलुरु में रह रहे हैं। एसबीआई कार्डस के जेडएमएसएसई हैं। बेहतर वेतन की चाह ने ट्रांसफर लेने पर मजबूर किया। 29 वर्षीया एमबीए चारू को प्रेग्नेंसी के दौरान नौकरी छोड़नी पड़ी। आज चार साल की बेटी की वजह से पति से दूर रहने पर मजबूर हैं। कहती हैं, हम दिन में फोन पर 10-15 बार तो बात कर ही लेते हैं। बेशक बातचीत बहुत लंबी नहीं होती, पर अपनी व्यस्तता के बावजूद बात करने का समय निकाल ही लेते हैं। पूरे दिन की तमाम जरूरी-गैरजरूरी बातें एक-दूसरे से शेयर करते हैं। इन दिनों हमारा घर बन रहा है, जिसकी वजह से पूरी भाग-दौड़ मुझे ही करनी पड़ती है। मैं यहां संयुक्त परिवार में रहती हूं, इसलिए उतना अकेलापन महसूस नहीं होता, जितना कि विशाल को होता है। हमारी लव मैरिज है और एमबीए साथ ही किया था। लाँग-डिस्टेंस मैरिज में लगातार संवाद बहुत आवश्यक है और सबसे बढकर एक-दूसरे पर विश्वास करना मायने रखता है।


पापारी बेजबरुआ और एसके बेजबरुआ
दूरी ने हमारे रिश्ते को और भी मजबूत किया, पापारी बेजबरुआ दिल्ली में ट्रैवल एजेंसी बिजनेस संभालती हैं और उनके पति एसके बेजबरुआ असम में होटल व्यवसाय में हैं। अपनी बेटी का करियर बनाने की चाह ने पापारी को दिल्ली में रोक रखा है। वह कहती हैं, कई बार पति से दूर रहना बोरियत भरा लगता है। कई बार असुरक्षित भी महसूस करती हूं। ऐसा कई बार हुआ जब मुझे अपने पति की जरूरत शारीरिक व संवेगात्मक दोनों रूप से महसूस हुई। हम रोज ही एक-दूसरे से बात करते हैं और सारे दिन में हुई बातों को शेयर करते हैं। अपनी जरूरतों को संतुलित रखने के लिए हम महीने में एक बार तो जरूर मिलते हैं। दूरियों ने हमारे रिश्ते को खोखला करने के बजाय ज्यादा  मजबूत कर दिया है क्योंकि हमेशा एक-दूसरे के लिए कुछ करते रहने का भाव हमें उत्साहित किए रहता है। हम एक-दूसरे की प्राथमिकताओं व जरूरतों को समझते हैं।

प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना शोवना नारायण
हम दूर रहकर भी पास प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना शोवना नारायण के विवाह को 26 वर्ष हो गए हैं और तब से वह और उनके राजदूत पति हरबर्ट ट्रैक्सल दूर रह रहे हैं। वह कहती हैं,  हमारी कोर्टशिप तक दूर रहकर हुई थी। जहां तक ऐसे विवाह के कायम रहने की बात है तो मुझे लगता है कि इसके लिए एक-दूसरे का सम्मान और एक-दूसरे पर विश्वास करना निहायत जरूरी है। अगर आपस में प्यार होता है तो आप एक-दूसरे को ग्रो करता देख प्रसन्न होते हैं। जहां पति-पत्नी साथ रहते हैं, वहां एक कमरे में रहते हुए भी वे अजनबी होते हैं, वे एक-दूसरे की पहचान और प्राइवेसी को महत्व नहीं देते हैं। कभी कोई समस्या आती भी है तो हो सकता पास होते हुए भी पति-पत्नी इतने व्यस्त हों कि उसे बांट ही न पाएं। मेरे सामने ऐसी दिक्कत कभी नहीं आई क्योंकि तीन-चार महीने के अंतराल में हम एक-दूसरे से मिल लेते हैं। दूर रहकर भी हमारे बीच इतनी निकटता है कि कभी अकेलापन महसूस ही नहीं हुआ।

लाँग डिस्टेंस मैरिज को सफल बनाने के लिए पहली कुंजी है संवाद, ताकि युगल निसंकोच होकर एक-दूसरे के साथ अपनी भावनाएं बांट सकें।
दूसरी बात कमिटमेंट, क्योंकि दूर रहने से कमजोर क्षणों में भटकना या किसी और का कंधा पाते ही बिखर जाना मुमकिन होता है।

तीसरी कुंजी है-जोखिम उठाने की इच्छा। अच्छी-बुरी स्थितियों का सामना करने की ताकत ही इस रिश्ते को बचा पाती है।

चौथा है दूरी होने पर भी एक-दूसरे पर निर्भरता। साथी के हमेशा उपस्थित होने का अहसास एक शक्ति देता है। इस तरह के रिश्ते में आप बहुत ज्यादा अपेक्षाएं नहीं रख सकते हैं क्योंकि साथी आपकी जिम्मेदारी उठाने के लिए मौजूद नहीं होता है। केवल सकारात्मक सोच पर ही इस तरह के रिश्ते कायम रह सकते हैं। प्यार, विश्वास और वचनबद्धता ही आपके बीच की दूरी को नजदीकियों में बदल सकती है।ये रही कामयाबी की मास्टर-की।


प्राइवेसी को महत्व नहीं देते हैं। कभी कोई समस्या आती भी है तो हो सकता पास होते हुए भी पति-पत्नी इतने व्यस्त हों कि उसे बांट ही न पाएं। मेरे सामने ऐसी दिक्कत कभी नहीं आई क्योंकि तीन-चार महीने के अंतराल में हम एक-दूसरे से मिल लेते हैं। दूर रहकर भी हमारे बीच इतनी निकटता है कि कभी अकेलापन महसूस ही नहीं हुआ।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हम यहां,तुम वहां