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फरीदाबाद के थानों को कंप्यूटरीकृत हुए काफी दिन हो गए, पर अभी भी थानों में रिपोर्ट फीडिंग से ज्यादा कुछ नहीं हो रहा। पुलिसकर्मियों को दोहरा काम करना पड़ रहा है। रजिस्टर में रिपोर्ट लिखने के साथ कंप्यूटर में भी चढ़ाना पड़ रहा है। जबकि कंप्यूटरीकृत शुरु करते समय थानों को पेपरलेस करने की योजना थी। ऐसी स्थित में थानों को ऑनलाइन करने में पुलिस विभाग के पसीने छूटना तय हैं।

वर्ष 2005 में प्रदेश के कई जिलों में एक साथ थानों का कम्प्यूटरीकरण किया गया था। सभी थानों के कम्प्यूटरों को पुलिस मुख्यालय से जोड़ा गया था। इसके तहत एसएसपी ऑफिस में बैठकर थानों की रिपरेट देखी ज सकी थी। इसकी शुरुआती योजना थी कि जल्द ही थानों को पेपर लेस किया जएगा। पर ऐसा नहीं हुआ। उल्टे थानों में कम्प्यूटर का इस्तेमाल रिपोर्ट दर्ज करने व विवेचना लिखने तक ही सीमित है। जबकि केंद्र सरकार की पहल से देश के हजरों थानों को ऑनलाइन करने के प्रयास किए ज रहे हैं। ऐसे में फरीदाबाद पुलिस को ऑनलाइन होने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। ऑनलाइन शिकायतों के निस्तारण के लिए पुलिस विभाग को थानेस्तर पर इंटरनेट एक्सपर्ट तैनात करने होंगे। अभी विभाग के पास गिने चुने एक्सपर्ट हैं।जो थानों में हैं भी उनकी योग्यता डाटा फीडिंग तक ही सीमित है। जिले के एक थानेदार की मानें तो कंप्यूटरीकरण तो हो गया प्रशिक्षित पुलिस कर्मी के छुट्टी पर चले जने से दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। बता दें कि प्रत्येक थानों एक से दो प्रशिक्षित कंप्यूटर ऑपरेटर तैनात हैं। जिनके छुट्टी पर जने के बाद रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दूसरे थानों के मुंशियों की मदद लेनी पड़ती है। डीएसपी हेडक्वार्टर के मुताबिक विभाग के पास पर्याप्त कंप्यूटर एक्सपर्ट हैं। ज्यादा से ज्यादा पुलिसकर्मियों को कंप्यूटर का प्रशीक्षण दिया ज रहा है।

 

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  • Web Title:रिपोर्ट फीडिंग तक सीमित हैं कम्प्यूटरीकृत थाने