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हमारी पार्टी में कोई गुट नहीं है

उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनते ही डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी विशेष कार्यशैली की झलक भी पेश कर दी है। इससे पहले कि रणबीर हत्याकांड में उनकी सरकार को घेरा जाता, उन्होंने मामला सीबीआई के हवाले करके विपक्ष को इस पर राजनीति का कोई मौका ही नहीं दिया। इसके अलावा उन्होंने बिजली कटौती बंद कराई, फिर दफ्तरों में छापे डलवा कर लापरवाह अधिकारियों को निशाने पर लिया। लेकिन सामने अभी कई और भी चुनौतियां हैं-राजधानी आयोग की रिपोर्ट का पिटारा खुलने वाला है, विकास नगर उपचुनाव जैसी परीक्षाएं ‘निशंक’ का इंतजार कर रही है। उत्तराखंड को आदर्श राज्य बनाने की बात करने वाले ‘निशंक’ से रू-ब-रू हुए अविकल थपलियाल

कुर्सी तक पहुंचने में आपको काफी इंतजार करना पड़ा ?
मुझे कभी भी कुर्सी की चाहत नहीं रही। लगभग 12 साल पहले मुझे उत्तर प्रदेश सरकार में पर्वतीय विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। पार्टी ने मुझे जो भी जिम्मेदारी सौंपी मैंने जनता की कसौटी पर खरा उतरने का प्रयास किया।

शुरू में ही आपने छापे व निलंबन की र्कारवाई शुरू कर दी। इससे क्या होगा?
मैंने सिर्फ लापरवाह अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की है और उन्हें सुधरने का पहला और आखिरी मौका दिया है। मेरी यह मुहिम रुकने वाली नहीं है। अधिकारियों को जनता के हित की बात सोचनी चाहिए। प्रदेश में कई कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी हैं। लेकिन मेरी लड़ाई भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ है। देवभूमि में एक आदर्श कार्यसंस्कृति विकसित करनी ही होगी।

रणवीर हत्याकांड से पुलिस की जो छवि खराब हुई, उसका क्या करेंगे?
कुछ लोगों की वजह से यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। इसके लिए समूचे पुलिस तंत्र को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मैंने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया। सरकार की मंशा पूरी तरह साफ रही है। इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारी व कर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गयी। सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति की। मैं पारदर्शिता का प्रबल पक्षधर हूं। दोषी लोग अवश्य दंडित होने चाहिए।

प्रदेश में अवैध कटान के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और एनजीओ की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे है?
अवैध कटान में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ खंडूड़ी सरकार ने त्वरित कार्रवाई की थी। कुछ एनजीओ की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। एनजीओ को जमीन पर काम करके दिखाना होगा। सरकार इन मामलों की समीक्षा कर रही है।

राज्य को बने आठ साल हो गए। इसकी प्रगति से कितने संतुष्ट हैं?
पूर्ण संतुष्टि तो कभी भी संभव नहीं है। नए राज्य के समक्ष अनेक कठिनाइयां है। राज्य की दशा और दिशा को पटरी पर लाया जाएगा। अभी कई क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है।

राज्य गठन के बाद प्रदेश में माफिया संस्कृति ने भी पैर पसारे हैं। माफिया और राजनीति के गठजोड़ को कैसे तोड़ेंगे?
हमारी सरकार ने पहले भी माफिया संस्कृति के खिलाफ खुलकर अभियान छेड़ा था। यह अभियान मेरी सरकार में भी जारी रहेगा। ऐसे तत्वों की कारगुजारी रोकने के लिए कड़े से कड़े कदम उठाए जाएंगे। 

आरोप है कि भाजपा सरकार केंद्र से मिली धनराशि का पूरा उपयोग नहीं कर पायी?
जनता को पता है कि केंद्र की मनमोहन सिंह की सरकार ने कई मामलों में प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार किया है। बीते सवा दो साल में प्रदेश को  लगभग एक दर्जन चुनावों से भी गुजरना पड़ा। अधिकतर समय प्रदेश में आचार संहिता का साया रहा। इससे विकास योजनाएं भी प्रभावित हुईं। इसके बावजूद भाजपा सरकार ने कई मोर्चो पर ऐतिहासिक कार्य किए।

राज्य को कर्ज के जाल से कैसे मुक्ति मिलेगी?
नए राज्य को अवस्थापना के लिए भारी धनराशि की जरूरत होती है। हम अपने संसाधनों को बढ़ाकर कर्जे को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।

दिल्ली में कई केन्द्रीय नेताओं से मिले। कैसा रिस्पांस रहा?
मुझे सभी केन्द्रीय मंत्रियों प्रणव मुखर्जी, पी. चिदम्बरम, गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा व मोंटेक सिंह आहलूवालिया का पूरा सहयोग मिला। मैंने राज्य की समस्याओं को उठाते हुए पूवरेत्तर की तरह 2020 तक विशेष पैकेज की मांग की है। मुझे पूरा विश्वास है कि केंद्र सरकार नए राज्य की कठिनाइयों को समझते हुए हर क्षेत्र में सहयोग करेगी।

पार्टी के अंदरूनी घमासान का क्या करेंगे ?
राजनीति में कोई भी डैमेज स्थायी नहीं होता। इस समय पूरी पार्टी एकजुट है। मुझे खंडूड़ी जी और कोश्यारी जी का पूरा सहयोग मिल रहा है। पार्टी में कोई गुट नहीं है।

अभी तक यूपी से परिसम्पत्तियों का निपटारा नहीं हो सका है?
इस मामले में दोनों ही सरकारों ने कई ठोस कदम उठाए हैं। उच्चस्तरीय कमेटी परिसम्पत्तियों के विवाद का हल ढूंढ़ रही है। शीघ्र ही अवशेष परिसम्पत्तियों के मुद्दे भी सुलझा लिए जाएंगे।

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