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बस्ते की छुट्टी, अब 11 हजार में मिलेगा लैपटाप

बस्ते की छुट्टी, अब 11 हजार में मिलेगा लैपटाप

स्कूलों में पढ़ने वाले पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को अब स्कूली किताबों से निजात मिल जाएगी और उन्हें सस्ते दाम पर लैपटाप मिल जाएगा।

अमेरिका की एक गैर सरकारी संस्था ‘वन लैपटाप पर चाईल्ड’ ने विशिष्ट भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर 30 लाख लैपटाप बनाए हैं जिन्हें वर्ष 2009 के दौरान देश के ग्रामीण, पिछड़े, जनजातीय क्षेत्रों के स्कूलों के बच्चों को महज 11000 रुपए प्रति लैपटाप की लागत से प्रदान किया जाएगा। हर लैपटाप के लिए मात्र एक वॉट बिजली की जरूरत है। इस लैपटाप को बच्चा 5 फुट की ऊंचाई से फैंक दे तो किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा तथा इसके पानी में गिर जाने से भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह लैपटाप शॉक प्रूफ, वाटर प्रूप, डस्ट प्रूफ है तथा इसकी स्क्रीन को सूर्य की रौशनी में भी पढ़ा जा सकता है। अभी तक प्रयोगात्मक तौर पर महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश कर्नाटक तथा तमिलनाडू के 20 स्कूलों में ऐसे 1000 लैपटाप वितरित किए गए हैं जो काफी सफल रहे हैं तथा शीघ्र ही इसे देशभर में लागू किया जाएगा।

भारत में इस संस्था के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश झ ने बताया कि संस्था का उद्देश्य वर्ष 2012 तक 5 वर्ष से 12 वर्ष तक आयु के सभी स्कूली बच्चों को पर्सनल लैपटाप प्रदान करना है। उनका कहना है कि मांग में बढ़ोतरी से इसकी कीमत 5000 रुपए प्रति लैपटाप तक लाने की योजना है।

उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों को सस्ती दरों पर लैपटाप प्रदान करने के लिए गूगल, ईवे, ब्राईट स्टार जैसी 12 बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में प्रत्येक कम्पनी ने 2 बिलियन डॉलर दान में दिए हैं।

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