class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बजट के बाद म्यूचुअल फंड

इस बजट में वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कुछ ऐसे सेक्टरों के लिए संभावनाओं के द्वार खोले हैं जो आगे चलकर काफी मुनाफा बटोर सकते हैं। अगर आप युवा हैं और सीधे शेयर बाजर में प्रवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं तो इस स्थिति में आप इन सेक्टरों में बेहतर परफॉर्म करने वाले करने वाले म्यूचुअल फंड स्कीमों में अपना पैसा डाल कर निश्चिंत हो सकते हैं। यह ध्यान में रखा जाए कि इस बजट में इन सेक्टरों पर विशेष जोर दिया गया है। इससे पहले इन सेक्टरों पर पूरी तवज्जो नहीं दी जा रही थी। इन फंड को लेकर कभी ज्यादा गंभीरता भी नहीं दिखाई गई। फंड इनवेस्टमेंट का आइडिया यह होता है कि फंड मैनेजर यह तय करता है कि किस सेक्टर पर फोकस किया जाए और किस सेक्टर का ठंडे बस्ते में डाला जाए। गौरतलब है कि यह बजट सेक्टर विशेष उपायों पर मौन रहा और उसने सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है। बजट के बाद उभरते इन सेक्टरों की जानकारी दे रहे हैं म्यूचुअल फंड रिसर्च फर्म वल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार

पॉवर

ऊर्जा विकास के लिए बजट में विशेष जोर दिया गया है और इस सेक्टर के लिए बजट राशि को बढ़ाया गया है। इसके चलते यह सेक्टर लाभ पाने वाले में सबसे आगे खड़ा है।

रिलायंस डायवर्सिफाइड पॉवर

इस फंड की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। इसे स्थापित करने के पीछे पॉवर सेक्टर में होने वाले सुधारों की उम्मीद काम कर रही थी। यद्यपि ये सुधार तो अस्तित्व में कभी आए ही नहीं, लेकिन फंड ने निराश नहीं किया। पिछले पांच वर्ष के दौरान फंड ने 46.31 प्रतिशत की वार्षिक औसत रिटर्न दी है। जबकि हालिया बुल रन (9 मार्च-30 जून तक) में इसने शानदार 76.52 प्रतिशत का रिटर्न दिया।

जैसा कि सभी जनते हैं कि सभी फंड 2008 में बुरी तरह से पिटे। इस फंड के बारे में इतना ही कहा जा सकता है कि यह सिर्फ 50.39 फीसदी ही नीचे आया। जैसा कि नाम खुद स्पष्ट करता है फंड ने पावर से जुड़े सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में निवेश किया है जैसे पावर जेनरेशन उपकरण बनाने वाली कंपनियों सीमेंस, क्रॉम्पटन ग्रीव्स में तथा पावर जेनरेशन व डिस्ट्रीब्यूशन में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, अरेवा डीएंडडी में। लेकिन उस समय फंड ने अपना फोकस बढ़ाते हुए नॉन पावर और इंफ्रा से जुड़े शेयरों जसे बैंकिंग (आईसीआईसीआई बैंक) में फैला लिया था ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में मौजूद अवसरों का लाभ उठाया जा सके। फंड मानेजर ने पावर थीम को अपनाते हुए अपने पोर्टफोलियो का फोकस पूरी तरह से बना कर रखा। इसका औसत पोर्टफोलियो साइज 18 रहा है। बाद में इस सेक्टर की और कंपनियों के सूचीबद्ध होने के बाद इसका पोर्टफोलियो का आकार बढ़ (31 मई को आकार 27 था) गया।

रिलायंस डायवर्सिफाइड पावर

टॉप होल्डिंग टॉप सेक्टर

कंपनी एसेट (प्रतिशत) सेक्टर एसेट (प्रतिशत)

तेल एवं प्राकृतिक गैस

इस बजट में इस क्षेत्र पर विशेष जोर देने का प्रावधान और तेल एवं प्राकृतिक गैस के लिए टैक्स लाभ को संगत बनाए जाने से इस फंड के पोर्टफोलियो को काफी फायदा होगा।

आईडीएफसी इंपीरियल इक्विटी

2008 में इक्विटी डायवर्सिफाइड क्षेत्र में यह एक टॉप फंड रहा। पिछले पूरे वर्ष इसने जोर लगाकर खुद को संभाले रखा और सिर्फ 42 प्रतिशत की गिरावट देखी जबकि इसकी कैटेगरी और बेंचमार्क क्रमश: 55 और 56 फीसदी नीचे आए थे।

यद्यपि फंड ने बुरे वक्त में बेहतर कार्य किया है, लेकिन अच्छे वक्त में इसने चमकदार प्रदर्शन नहीं किया। यह केवल पांच तिमाहियों में केवल एक बार कैटेगरी एवरेज को पीछे छोड़ सका जबकि कैटेगरी इस दौरान पॉजिटिव रिटर्न दे रही थी। हो सकता है यह इसलिए हुआ हो कि इसका लार्ज कैप के प्रति रुझान रहा है जो मिड कैप के चलने पर रुकने लगते हैं। वर्तमान में फंड तेल एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर पर फोकस कर रहा है। इसका पिछले 31 मई को तीन महीने का औसत एक्सपोजर उसके कुल पोर्टफोलियो का 24.09 फीसदी था जिसे अब बढ़ाकर 26 फीसदी कर दिया गया है। इसमें शामिल कंपनियां हैं रिलायंस इंडस्ट्रीज (7.01), गेल (4.50), ओएनजीसी (5.26) तथा आईओसीएल (4.08) जो इस सेक्टर की दिग्गज हैं।

पारम्परिक रूप से 26 शेयरों का पोर्टफोलियो इस फंड ने बनाकर रखा है। लेकिन एक सेक्टर की तरफ झुकाव लेकर फंड मैनेजर बुल मार्केट के रिकार्ड को पीछे छोड़ने की फिराक में है।

फार्मा

प्रमुख दवाओं पर कस्टम डच्यूटी की छूट फार्म सेक्टर की मदद करेगी।

फ्रेंकलिन फार्मा

फार्मा थीम की शुरुआत करने वाला यह फंड मार्च 1999 में लांच किया गया था जिसका लक्ष्य इस सेक्टर की संभावनाओं का फायदा उठाना था। चूंकि इस सेक्टर की ज्यादातर कंपनियां मिड और स्माल कैप में आती हैं इसलिए इसमें उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा होता है। लेकिन अपनी कैटेगरी में इस फंड ने काफी स्थिर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2008 में इसने 27.59 का नुकसान खाया जो अन्य इक्विटी विकल्पों की तुलना में काफी कम है। इस नजरिए से इसे आकर्षक माना जा सकता है। हालिया रैली में फंड ने 49 फीसदी इजाफा दर्ज किया जबकि पिछले पांच वर्ष की वार्षिक औसत रिटर्न 14.62 फीसदी रही है।

अपने नाम के ही मुताबिक फंड ने हेल्थकेयर सेक्टर में ज्यादातर निवेश किया है। इसके पोर्टफोलियो में रैनबैक्सी, ग्लैक्सोस्मिथलाइन फार्मास्यूटिकल्स, सिपला, डॉ. रेड्डी और फाइजर प्रमुख हैं जो किसी न किसी समय पोर्टफोलियो में सबसे अगला स्थान बनाए रहे। वर्तमान में इसके पोर्टफोलियो के टॉप 5 एकाउंट करीब 41 फीसदी का हिस्सा लिए हुए हैं जिसमें से ल्यूपिन अकेले 10 फीसदी है।

इस समय फंड ने 21 (31 मई को) शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया हुआ है जो उसकी पारम्परिक 18 की संख्या के काफी नजदीक है।

इंफ्रास्ट्रक्चर

इस बजट में जिस बात पर जोर दिया गया है वह इंफ्रास्ट्रक्चर। इस सेक्टर में होने वाली व्यापक गतिविधियों का फायदा इस फंड को होने की पूरी उम्मीद है।

आईसीआईसीआई प्रू इंफ्रास्ट्रक्चर

कैटेगरी में सबसे ज्यादा अल्फा जेनरेटर यह फंड 2007 और 2008 में सबसे बेहतर परफॉर्मर था। इसका श्रेय इसकी सेक्टर रोटेशन की रणनीति और डेरिवेटिव्स और निफ्टी में मामूली एक्सपोजर को जाता है। वर्ष 2008 में फंड ने सही कदम उठाया। इसने लार्ज कैप में अपना एक्सपोजर बढ़ाया और डेट पर भरोसा किया और डेरिवेटिव्स का खुल कर इस्तेमाल किया। लेकिन हालिया रैली (9 मार्च-30 जून) में इसने सिर्फ 60.26 प्रतिशत (कैटेगरी का औसत-81.82 प्रतिशत) का रिटर्न दिया। हालांकि इस फंड में इक्विटी का एक्सपोजर मार्च के 89 प्रतशित से गिरकर मई में 57 फीसदी आ गया।

यह फंड मैनेजर की शैली और निवेश का नजरिया है जो वल्यूएशन पर आधारित है। रैली ने ज्यादातर इंफ्रा शेयरों को बढ़ाया जो उनकी फेयर वल्यू से ज्यादा तक चले गए तो फंड मैनेजर संकरण नरेन ने अपना इक्विटी एक्सपोजर घटा दिया। जब वह लांग टर्म अवसर देखेंगे तो फिर से बाजार में प्रवेश करेंगे। वह भीड़ के पीछे दौड़ने की बजाय अपने फैसलों पर भरोसा करते हैं। पिछले साल यह फंड काफी थका लगा, लेकिन इस साल इसमें औसत 40 शेयर रहे हैं।

ऑटो

बढ़ी हुई इंफ्रास्टक्चर राशि से इस सेक्टर में निवेश करने वाली कंपनियों को फायदा होगा और उसका फायदा इस फंड का मिलेगा।

यूटीआई ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स

फंड को अप्रैल 2004 में यूटीआई के थीमैटिक फंड अम्ब्रैला के तहत पांच अन्य फंड्स के साथ लांच किया गया था। बाद में 2008 में इसका नाम यूटीआई ऑटो सेक्टर फंड से बदलकर वर्तमान वाला रखा गया। फंड की पिछली परफॉर्मेंस आकर्षक नहीं रही। लेकिन ट्रांसपोर्ट सेक्टर में इसके एक्सपोजर और ऑटो सेगमेंट में हाल में हुए इजाफे ने इसे फिर से केंद्र में ला खड़ा किया है। पांच वर्ष में इसकी वार्षिक औसत 10 फीसदी से कम रही। वर्ष 2008 में इसने 48.77 फीसदी का नकारात्मक प्रदर्शन किया लेकिन हालिया रैली में (9 मार्च-30 जून) इसने 57 फीसदी का बेहतरीन प्रदर्शन किया। जबकि इसका साल का अब तक का प्रदर्शन सेंसेक्स की लाइन (सेंसेक्स 54.5 फीसदी और फंड 52.21 फीसदी) में ही है।

इस फंड का काफी फोकस आधारित पोर्टफोलियो है जिसमें से 62 फीसदी में टॉप 10 शेयर हैं। इसमें महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, टाटा मोटर्स तथा मारुति सुजूकी शामिल हैं। इस समय बजाज ऑटो (10.73) और हीरो होंडा मोटर्स (8.48 फीसदी) प्रमुख हैं।

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