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नौकरी जाने पर

मंदी के इस दौर में नौकरी छूट जाना आम बात है, लेकिन इसमें दोराय नहीं कि जिसके साथ ऐसा होता है, उसके लिए यह निहायत तकलीफदेह तजुर्बा होता है। खासकर तब तो ये और भी ज्यादा पीड़ा देने वाला अनुभव बन जाता है, जब आप अपने जॉब से प्यार करते हों, और इसके बगैर रह ही न सकते हों। लेकिन ‘पिंक-स्लिप’ का शिकार होने पर दुखी होकर घर बैठ जाना भी अक्लमंदी नहीं है। जरूरत है, अपना मनोबल बनाए रखकर हालात का मुकाबला करने की।

थ्री-सी का फॉर्मुला

ले-ऑफ के बाद नई ताकत के साथ फिर से उठ खड़े होने के लिए अंग्रेजी के सी अक्षर से शुरू होने वाले तीन शब्दों पर अमल का फॉर्मुला कारगर हो सकता है। ये हैं: कनैक्ट, क्लियर, कमिटेड। कनैक्ट का मतलब है, मुसीबत की इस घड़ी से उबरने के लिए भावनाओं को शुभचिंतकों के साथ साथ बांटने की सोचें। अपना नेटवर्क फिर से मजबूत करें। अपनी जॉब हिस्ट्री पर नजर डालें। यूएसपी और प्राथमिकता तय करें, और सही कंपनी खोजकर जॉब पाने का प्रयास करें।

क्लियर का मतलब है, अगले जॉब को लेकर नजरिया स्पष्ट रखें, और उसके हिसाब से ही आगे बढ़ें। देखें कि आपका वैल्यू सिस्टम कंपनी के सिस्टम से मेल खाता है या नहीं। अगर ऐसा न किया, तो नए काम में संतोष नहीं मिलेगा। इसके बाद बारी है कमिटेड की, जिसका मतलब है नया जॉब हासिल करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करके उसे पूरी निष्ठा से लागू करने में जुट जाएं। अगर फिर भी कोई समस्या महसूस हो, तो परिवार और मित्रों का सहारा लेने में संकोच न करें। करियर कोच की सेवाएं भी ले सकते हैं। लेकिन अपनी सोच को हमेशा पॉजिटिव रखें। दुखी और निराश होकर जो मिले, उसी को स्वीकार करने से परहेज करें।

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