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मई में बढ़ी औद्योगिक वृद्धि दर

मई में बढ़ी औद्योगिक वृद्धि दर

चुनावी खर्चे और प्रोत्साहन पैकेज के बलबूते देश की औद्योगिक वृद्धि दर चालू वित्तीय वर्ष के दूसरे माह में भी सकारात्मक बनी रही और मई के महीने में औद्योगिक उत्पादन एक वर्ष पूर्व इसी माह की तुलना में 2.7 फीसद ऊपर रहा।


सरकार इसे अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत के संकेत बता रही है जबकि अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि मानसून में गड़बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। हालांकि मई की औद्योगिक वृद्धि दर का आंकड़ा साल भर पहले के 4.4 फीसदी से कम है इसका अप्रैल के 1.2 फीसदी के आंकड़े के मुकाबले दोगुना होना उत्साहजनक है। उल्लेखनीय है कि पिछले अक्तूबर 2008 से यह आंकड़ा महीनों तक शून्य से कम रहा।


चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में औद्योगिक वृद्धि दर औसतन 1.9 फीसदी रही जो पिछले वित्त वर्ष की उक्त अवधि में 5.3 थी। प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादन मई में 14.7 फीसदी गिरा और चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में 27.2 फीसदी गिरा। वित्त सचिव आशोक चावला ने कहा कि औद्योगिक उत्पादन में सुधार हो रहा है और मुझे लगता है कि उम्मीद के मुताबिक हम लीक पर वापस आ रहे हैं।


अन्य विशेषज्ञों ने भी इन आंकड़ों के संदर्भ में भी कहा कि वृद्धि दर में कमी के लिहाज से बुरा दौर खत्म हो चुका है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि मैं यह कहता रहा हूं और अन्य भी कह रहे हैं कि सबसे बुरा दौर खत्म हो चुका। वास्तवित प्रश्न यह है कि कितनी तेजी से हम वृद्धि की रफ्तार पकड़ते हैं।


पिछले कई महीनों से गिरावट दर्ज कर रहे एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र टिकाऊ उपभोक्ता सामान उद्योग में भी वृद्धि दर्ज की। क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा कि यह मुख्य तौर पर सरकारी खर्च के कारण बेहतर हुई। चुनाव और छठे वेतन आयोग के कारण इसे प्रोत्साहन मिला। माकपा के पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने पहले ही कहा था कि चुनावी खर्च 40000 करोड़ रुपए से अधिक हुआ है। यह कहने का उनका अर्थ था कि इस तरह के खर्च से अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ी है।


प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादन में मई के महीने के दौरान 14.7 फीसदी की गिरावट आई है। जोशी ने कहा कि खाद्य पदार्थों के मामले में हालात और बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में मानसून मुश्किल खड़ी कर सकता है। अहलूवालिया ने कहा कि हफ्ते भर पहले के मुकाबले मानसून में सुधार है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि देश के बड़े इलाके में बारिश हुई है। मुझे लगता है कि यह अभी सच है कि पश्चिमोत्तर में बारिश कम हुई है। हमें देखना होगा कि पूरे जुलाई में कैसी बारिश होती है।


सूती कपड़े, जूट और धातु से बने उत्पाद जैसे आठ खंड़ों में गिरावट दर्ज हुई। इधर आईआईपी में 80 फीसदी का भारांक रखने वाले विनिर्माण विभाग की वृद्धि दर 2.5 फीसदी रही जबकि खनन उत्पादन 3.7 और बिजली उत्पादन 2.7 फीसदी बढ़ा। एचडीएफसी बैंक की अर्थशास्त्री ज्योतिंदर कौर ने कहा कि आईआईपी मुख्य तौर पर प्रोत्साहन पैकेज और छठे वेतन आयोग के कारण बढ़ा।

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