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धर्मशाला-मैक्लॉडगंज: देख नजारे कुदरत के

धर्मशाला-मैक्लॉडगंज: देख नजारे कुदरत के

बारिश की फुहार पड़ती है तो हिमाचल प्रदेश का हर हिस्सा जैसे खिल-खिल उठता है। मन बरबस ही इस प्रदेश की सैर करने को मचलने लगता है। ऐसे में यदि धर्मशाला-मैक्लॉडगंज के नजारे देखने को मिल जाएं तो फिर कहना ही क्या!  हिमालय की धौलाधार पर्वत श्रृंखला के बेहद खूबसूरत दृश्य आंखों से होते हुए जेहन पर हमेशा के लिए छा जाते हैं। 

दिल्ली से करीब सवा पांच सौ किलोमीटर दूर धर्मशाला के दो हिस्से हैं- अपर धर्मशाला और लोअर धर्मशाला। नीचे स्थित छोटे मगर व्यस्त शहर को ही धर्मशाला कहते हैं। यहां पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे उपयुक्त है। दिल्ली के कश्मीरी गेट वाले बस अड्डे से हिमाचल रोडवेज की आरामदायक बसें 11-12 घंटे में यहां पहुंचा देती हैं। कनॉट प्लेस की चंद्रलोक बिल्डिंग से हिमाचल पर्यटन की बसें भी मिल जाती हैं।

धर्मशाला में देखने के लिए कुणाल पथरी मंदिर है, जिसे 52 शक्तिपीठों में गिना जाता है। यहां बेहद खूबसूरत वॉर मेमोरियल गार्डन भी है, जिसमें विभिन्न लड़ाइयों में शहीद हुए हिमाचल प्रदेश के सैनिकों के नाम लिखे हुए हैं। इसके पास ही कांगड़ा कला संग्रहालय है, जिसे देख कर आप इस क्षेत्र के इतिहास और कला-संस्कृति से परिचित हो सकते हैं। ऊपरी धर्मशाला में फोरसिथ गंज, मैक्लॉडगंज, तरणू, नड्डी जैसे स्थान हैं, लेकिन असली रौनक मैक्लॉडगंज में ही होती है। धर्मशाला से यहां का सफर कुछ ही मिनटों में तय हो जाता है।

मैक्लॉडगंज ही वह जगह है, जहां पर सन् 1959 में बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा अपने हजारों अनुयाइयों के साथ तिब्बत से आकर बसे थे। तिब्बत की राजधानी ल्हासा की तर्ज पर इस जगह को मिनी ल्हासा भी कहा जाता है। यहां की सबसे मशहूर जगह दलाई लामा का मंदिर और उस से सटी नामग्याल मोनेस्ट्री है। यहां आप टैक्सी से भी जा सकते हैं और पैदल भी। दलाई लामा के मंदिर में बौद्ध धर्म से संबंधित सैंकड़ों पांडुलिपियों को देख कर सैलानी अचंभित हुए बिना नहीं रहते। इस मंदिर के सामने ही दलाई लामा का निवास भी है। कुछ ही दूरी पर भागसूनाग मंदिर है, जहां बने सरोवर में पहाड़ों से बह कर आते पानी में नहाने का मजा ही कुछ और है। यहां से दो-ढाई किलोमीटर दूर एक झरना है। ट्रैकिंग के शौकीन पर्यटक यहां जाने से खुद को नहीं रोक पाते। मैक्लॉडगंज से थोड़ा नीचे उतरने पर घने पेड़ों से घिरे 1863 में बने सेंट जॉन चर्च की शांति आपको बरबस ही अपनी ओर खींच लेती है। यहां से नड्डी की तरफ बढ़ने पर रास्ते में पहाड़ों से घिरी डल झील मिलती है। यह एक  पिकनिक स्पॉट भी है, जहां आप बोटिंग के मजे ले सकते हैं। यहां से ऊपर की ओर है नड्डी, जहां से आप हिमालय की धौलाधार पर्वत श्रृंखला  को अपलक देखना पसंद करेंगे।

धर्मशाला से बाहर जाना चाहें तो टैक्सी से एक ही दिन में कई जगह देखी जा सकती हैं। स्वामी चिन्मयानंद का आश्रम चिन्मय तपोवन, चामुंडा जी का मंदिर, बैजनाथ स्थित भगवान शिव का ऐतिहासिक मंदिर, कांगड़ा मंदिर और प्रसिद्ध ज्वाला जी मंदिर भी कोई दूर नहीं है। नूरपुर का किला और कांगड़ा फोर्ट भी देखे जा सकते हैं। रास्ते में चाय के बाग देखना भी एक दिलचस्प अनुभव होता है।
 
धर्मशाला और मैक्लॉडगंज में होटल, गैस्ट हाउस आदि की भरमार है। अब तो नड्डी की तरफ भी काफी होटल बन गए हैं। मगर धर्मशाला के मुख्य बाजार के बीचोंबीच स्थित मिड टाउन रेस्तरां के खाने की तारीफ यहां हर कोई करता है। चाइनीज फूड के शौकीनों के लिए मैक्लॉडगंज फेवरेट ईटिंग स्पॉट है। यहां इसे तिब्बती फूड कहते हैं, चाइनीज नहीं।


शॉपिंग के लिए मैक्लॉडगंज में कपड़ों की कई दुकानें हैं। तिब्बती कारीगरी या कांगड़ा चित्रकारी के अलावा बौद्ध धर्म से जुड़े प्रार्थना चक्र, तिब्बती शैली में बने अचार, चटनियां और कांगड़ा चाय, सेब से बनी बियर भी ले सकते हैं।

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