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नए सहयोगियों की तलाश में है तालिबान

नए सहयोगियों की तलाश में है तालिबान

पाकिस्तान और अमेरिकी सेना के बढ़ते सैन्य हमले को देखते हुए तालिबान और अलकायदा के आतंकवादी ईरान में सक्रिय तथा ईरान पाकिस्तान संबंधों में कड़वाहट का कारण बने आतंकवादी गुट जुनदल्लाह से हाथ मिला सकते हैं।

अमेरिकी अखबार वाशिंगटन टाइम्स ने एक सैन्य विशेषज्ञ अशरफ अली के हवाले से बताया कि जुनदल्लाह का अलकायदा और तालिबान से पुराना संबंध रहा है। उन्होंने बताया कि आतंकवादी संगठन तहरीके तालिबान प्रमुख बैतुल्ला मेहसूद जुनदल्लाह गुट में शामिल हो सकता है।

अली ने कहा कि इस प्रकार का कोई भी कदम पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर तालिबान और अलकायदा आतंकवादियों द्वारा चलाए जा रहे आतंकवाद को नया रूप देगा। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यह संघर्ष अफगानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा से हटकर पाकिस्तान ईरान की सीमा पर जा सकता है। अली ने बताया कि संघर्षग्रस्त इलाकों के दक्षिण में ब्लूचिस्तान की तरफ पाकिस्तानी सेना तैनात नहीं है, जिसका फायदा आतंकवादी उठा सकते हैं।

पिछले सप्ताह ही ब्लूचिस्तान के कलात जिले में आत्मघाती हमलावर ने एक होटल में खुद को उड़ा दिया था, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और 11 घायल हो गए थे। इस हमले का उद्देश्य अफगानिस्तान में तैनात नाटो सैनिकों को होने वाली आपूर्ति में बाधा डालना था।

विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना ब्लूचिस्तान में तालिबान और अलकायदा आतंकवादियों की बढ़ती गतिविधियों का संकेत है तथा साथ ही साथ यह वजिरिस्तान में सक्रिय आतंकवादियों के जुनदल्लाह गुट के साथ बढ़ते संपर्को का संकेत है। क्वेटा में काम करने वाले एक पत्रकार मलीक सिराज ने अखबार को बताया कि जुन्नदल्लाह गुट के एक नेता अब्दुल मलिक रीगी ने कराची के एक मदरसे में शिक्षा पाई है और वहीं पर तालिबान आतंकवादियों ने भी पढ़ाई की है। इस बात की पूरी संभावना है कि तालिबान, अलकायदा और जुन्नदल्लाह आतंकवादी गुट संयुक्त रूप से अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान के लिए खतरा बन सकते हैं।

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