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नींद में सांस लेना भूल जाता है दो साल का मासूम

अपने दूसरे जन्मदिन पर नन्हा मुआज अगर कुछ चाहता है तो सिर्फ लंबी जिंदगी की दुआ। दस जुलाई को दो वर्ष का होने जा रहा यह मासूम  देश में अकेला बच्चा है जो सेंट्रल कंजिनाइटल हाइपो-वेंटिलेशन सिंड्रोम (सीसीएचएस) का शिकार है और दो साल से जिंदगी की जंग जीत रहा है। मुआज का इलाज कर रही डाक्टरों की टीम डा. वंदिता शर्मा, डा. अमित और डा. डी प्रसाद का कहना है कि भारत में अबतक इस बीमारी से ग्रस्त बच्चे बमुश्किल तीन से चार महीने तक ही बच पाए हैं। विदेशों में कई लोग इस बीमारी के शिकार हैं। वे अच्छे पदों पर और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। इस बीमारी में सोते समय कई बार सांस रुक जाती है। दिमाग से सांस लेने के लिए संकेत नहीं मिलते।

सेक्टर 15 रेलविहार स्थित बी जीरो जीरो एट नंबर फ्लैट में रहने वाले डॉ. अखलाक अहमद के पोते, हिना और डॉ. मोहम्मद अहमद के बेटे मुआज के गले में श्वास नली में चीरा लगाकर टच्यूब डाल दी गई है जिससे वह सांस लेता है। जब भी मुआज सोता है टच्यूब में वेंटिलेटर लगा दिया जाता है। उसे खाने की चीजें पीस कर दी जती है ताकि वह निगल सके। मानसिक और शारीरिक विकास में वह अन्य बच्चों से पिछड़े मुआज को इंफेक्शन के डर से बाहर नहीं निकाला जता। पेट फूलने के कारण ऑपरेशन कर उसकी आंत का एक हिस्सा भी निकाला जा चुका है। दूसरे बच्चों को खेलता देख मुआज भी मचलता है। टच्यूब पर हाथ रखकर बोलने की कोशिश करता है पर बोल नहीं पाता।

क्या है इलाज : शीतला अस्पताल की निदेशक चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. वंदिता शर्मा का कहना है कि मुआज का दो साल की उम्र के बाद फ्रेनिक नर्व पेसिंग नाम का ऑपरेशन किया जाए तो उसे वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें पेसमेकर जैसी मशीन शरीर में लगा दी जएगी। जब कार्बनडाइऑक्साइड का स्तर बढ़ेगा यह अलार्म देगी और फेफड़े काम करने लगेंगे। मगर यह ऑपरेशन भारत में नहीं होता। विदेश में इस ऑपरेशन पर करीब 70- 80 लाख रुपये लगेंगे। मगर मुआज का परिवार इतने पैसे खर्च करने में असमर्थ है। डा. अहमद कहते हैं कि अगर सरकार या कोई और उनकी सहायता करें तो मुआज को जिंदगी दी जा सकती है। इस बीमारी के बारे में देश में जानकारी भी काफी कम है। अबतक इंटरनेट और रिसर्च जनरल की मदद से का इलाज हो रहा है।

क्या है किंवदंती : सीसीएचएस को ऑनडाइन का श्राप भी कहते हैं। कहते हैं ऑनडाइन जलपरी को धरती के एक राज से प्यार हो गया। उसने राज से शादी कर ली। धरती पर आकर जलपरी पर उम्र का प्रभाव पड़ा और राज उसे भूल गया। जलपरी के पिता समुद्र को यह पता चला तो उसने राज का श्राप दिया कि जब तक वह जगता रहेगा उसकी सांस चलती रहेगी। जैसे ही वह सोएगा वह सांस लेना भूल जाएगा।

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