class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बल्ले के बादशाह को लगा 60वां साल

बल्ले के बादशाह को लगा 60वां साल

सुनील गावसकर भारतीय खेल जगत की ऐसी शख्सियत हैं जिनकी ठोस और लाजवाब तकनीक से लबरेज बल्लेबाजी का लोहा पूरी दुनिया में माना जाता है। 10 जुलाई, 1949 को बम्बई में जन्मे सनी शुक्रवार को अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। हमारे देश में किसी व्यक्ति के लिए उम्र का साठवां साल बहुत अहम होता है। इसे ज्यादातर लोग रिटायरमेंट के साल के रूप में याद रखते हैं, लेकिन गावसकर क्रिकेट के मैदान से बतौर खिलाड़ी 22 साल पहले रिटायर होने के बावजूद आज भी अपने चाहने वालों के दिलों में राज कर रहे हैं। अनेक विश्व रिकॉर्डो के साथ अपना नाम जोड़ने के कारण उन्हें सुनील मनोहर ‘रिकॉर्डर’ गावसकर भी कहा गया।

अपने बल्ले से खौफनाक तेज गेंदबाजों में खौफ पैदा करने वाले सनी के हाथों में अब बल्ला नहीं बल्कि कमेंट्री करने के लिए माइक और लिखने के लिए कलम रहती है। लेकिन इसमें भी सनी का कोई सानी नहीं है। वह 1971 में वेस्टइंडीज में पहला टेस्ट खेलने के बाद से आज तक क्रिकेट के एवरेस्ट पर ही नजर आते हैं।

उनके साथी ओपनर के रूप में दूसरे छोर पर खड़े होकर सनी की सम्पूर्णता को बारीकी से देख चुके चेतन चौहान का कहना है कि, ‘सनी की सफलता का राज उनके फौलादी इरादे थे। उनकी ठोस तकनीक, अविश्वसनीय धैर्य और किसी योगी जैसी ध्यान शक्ति उन्हें मैदान पर लम्बे वक्त तक टिकने में मदद करती थी।’ चौहान ने कहा, ‘खुद पर अटूट विश्वास गावसकर की सबसे बड़ी ताकत थी।’ अपने और देश के सम्मान के लिए दुनिया के किसी भी मंच पर अड़ने, लड़ने और खुलकर लिखने-बोलने का जो जज्बा सनी ने दिखाया वह आसानी से किसी और में देखने को नहीं मिलता। यही वजह है कि, अपने साथी और पूर्व क्रिकेटरों से लेकर आज की पीढ़ी के युवा क्रिकेटर भी गावसकर की महानता से अभिभूत नजर आते हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बल्ले के बादशाह को लगा 60वां साल