class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सिंचाई परियोजना पर ध्यान देना होगा

मानसून की देरी कृषि के लिए कितनी नुकसानदेह है ?

अभी तक के आंकड़ों को देखें तो उत्तर भारत में 46 फीसदी कम बारिश हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हो रहा है। नर्सरी तैयार है लेकिन बारिश नहीं हो पाने से रोपाई नहीं हो पा रही है। नर्सरी को भी ज्यादा दिन तक रखा गया तो फिर वे पौधे अच्छा दाना नहीं दे पाते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि अब तक का विलंब भी उत्पादन में 20-25 फीसदी तक की गिरावट ला सकता है।

उत्तर भारत के काफी हिस्से में सिंचाई हुई है, वहां तो स्थिति काबू में होनी चाहिए?

बांधों में पानी घटने से बिजली उत्पादन घटा है। पंजाब, हरियाणा में सिंचाई ज्यादातर ट्यूबवेल से होती है। सिंचाई के लिए आठ-दस घंटे लगातार बिजली नहीं मिल पा रही है। जो किसान डीजल सैट से सिंचाई कर रहे हैं, उनकी लागत बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश में बड़ी नहरें सूखी पड़ी हैं क्योंकि गंगा में पानी घट गया है। सिर्फ 20 फीसदी खेती को ही सिंचाई मिल पा रही है।

मानसून की देरी अक्सर खेती के लिए समस्या बनती है, क्या करना चाहिए?

सही मायने में देखा जाए तो मानसून का कोई विकल्प हमारे पास नहीं है। फिर भी सिंचाई परियोजनाओं में तेजी लानी होगी। भूजल स्तर को सुधारना होगा। बारिश के जल को संरक्षण करना होगा। ज्यादा पानी लेने वाली फसलों मसलन गन्ना, धान आदि पर से निर्भरता कम करनी होगी। उन फसलों को अपनाना होगा जिन्हें पानी की जरूरत कम हो। जल संसाधनों के संरक्षण और फसल चक्र के लिए सरकार को दीर्घकालिक रणनीति बनानी चाहिए। वैसे, भी बार-बार एक जैसी फसलें लेने से कई राज्यों में प्रति हेक्टेयर उत्पादन घटने लगा है।

पूर्व कृषि मंत्री एवं कृषि विशेषज्ञ

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सिंचाई परियोजना पर ध्यान देना होगा