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मानसून

देश में ग्रीष्मकाल में दक्षिण पश्चिम हवाएं बारिश करती है जिन्हें मानसून कहा जाता है। मानसून अरब भाषा के शब्द मौसम से बना है। प्राचीन काल में मानसून का भले ही कोई वैज्ञानिक आधार नहीं रहा हो, लेकिन इन दक्षिण पश्चिम हवाओं का अस्तित्व बराबर था। इतिहास में उल्लेख है कि भारतीय व्यापारी सर्दियों में उत्तर पूर्वी हवाओं के सहारे समुद्र नौकाओं से अफ्रीका और अरब देशों में व्यापार के लिए जाते थे और ग्रीष्मकाल में दक्षिण पश्चिमी हवाओं के सहारे वापस लौटते थे। ये दोनों ही सर्दियों और गर्मियों के मानसून हैं। पर तब इन हवाओं की सक्रियता जानने के लिए न तो सैटेलाइट थे न समुद्र में लगने वाले उपकरण। लेकिन तब भी पक्षियों के व्यवहार, हवाओं के पैटर्न तथा पेड़-पौधों के आधार पर लोग इन हवाओं की सक्रियता का आभास पा लेते थे। आज के मौसम विभाग के मुकाबले तब का आकलन भी कमतर नहीं होता था।

कैसे सक्रिय होता है मानसून

अप्रैल-मई में सूर्य हिन्द महासागर में विषुवत रेखा के ठीक ऊपर होता है। इससे समुद्र गरमाता है और उसका तापमान 30 डिग्री तक पहुंच जाता है। तब हिन्द महासागर के दक्षिणी हिस्से में मानसूनी हवाएं सक्रिय होती हैं। ये हवाएं आपस में क्रास करते हुए विषुवत रेखा पार कर एशिया की तरफ बढ़नी शुरू होती हैं। इसी से समुद्र के ऊपर बादलों के बनने की प्रक्रिया शुरू होती हैं। विषुवत रेखा पार कर हवाएं और बादल बारिश करते हुए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर की तरफ बढ़ते हैं। जहां से मानसूनी हवाएं दो भागों में विभाजित हो जाती हैं। एक-अरब सागर शाखा तथा दूसरी बंगाल की खाड़ी शाखा।

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