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उतार-चढ़ाव से बचें

अकसर डेट फंड में निवेश करते समय लोगों की ये धारणा होती है कि उनकी पूंजी सुरक्षित रहेगी। डेट फंड या बांड फंड म्यूचुअल फंड होते हैं, जो कि सरकार और कारपोरेट द्वारा जारी बांड, डिबेंचर और फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करता है। इन फंड की एनएवी डिबेंचर और बांड की बाजार कीमतों पर निर्भर करते हैं। ऐसे में लोगों का ऐसा सोचना कि म्यूचुअल फंड से उनकी पूंजी सुरक्षित रहेगी, सही नहीं है। बाजार में जब भी आप बांड या फंड में निवेश करने के बारे में सोचें, तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें।

बांड की बाजार कीमतें अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों में आए बदलाव के अनुसार बदलती रहती है। जब ब्याज दर बढ़ेगी, बांड की मार्केट वैल्यू गिरेगी और फंड का एनएवी भी गिरेगा। वहीं ब्याज दर में गिरावट होने पर बांड फंड की एनएवी बढ़ती है।

किसी भी फंड का उतार-चढ़ाव मुख्यत: उसकी समय सीमा पर निर्भर करता है। जितनी ज्यादा समय सीमा होगा, फंड उतना ही ज्यादा संवेदनशील होगा। किसी भी फंड की ड्यूरेशन की जानकारी होने पर आप इस बात का अंदाज लगा सकते हैं कि आने वाले समय में इसकी एनएवी में किस तरह परिवर्तन होगा।

डच्यूरेशन के अलावा किसी फंड की औसत मैच्योरिटी से आपको फंड के बेहतर कर सकने के बारे में जानकारी मिल सकती है। एक फंड जिसकी औसत मैच्योरिटी दस वर्ष है, ऐसे फंड जिसकी औसत मैच्योरिटी तीन वर्ष है, के मुकाबले ज्यादा एनएवी में बदलाव देखने को मिलेगा।

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