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मृतक ने मनाया पुनर्जन्म दिवस

उत्तर प्रदेश में एक ‘मृतक’ के जन्मदिन मनाने का मामला प्रकाश में आया है। चौंकाने वाली यह घटना राजस्व कर्मचारियों के कारनामे से हो सकी। राजस्वकर्मियों ने आजमगढम् के लाल बिहारी को अभिलेखों में 30 जुलाई 1974 को मृतक दिखा दिया था।लाल बिहारी ने लगभग 18 वर्ष की लम्बी कानूनी लडमई लडम्ी और किसी तरह 30 जून 1994 को वह अभिलेखों में पुनर्जीवित हो सके।

इसके लिए वह कई चुनाव लड़े अधिकारियों को कटघरे में खडम करवाया। उच्चाधिकारियों के दर-दर भटके। लाल बिहारी ने बताया कि अभिलेखों में जीवित होने के बाद उन्होंने ‘मृतक संघ’ बनाया और अभिलेखों में मृत घोषित लेकिन जीवित लोगों की लडमई शुरू की। वह दावा करते हैं कि अभी तक उन्होंने तीन सौ से ज्यादा लोगों को ‘जीवित’ करवाया है।

इसके लिए उन्हें अदालतों अधिकारियों पत्रकारों और समाज के अन्य जिम्मेदार लोगों के दर-दर भटकना पडम। उन्होंने बताया कि अभिलेखों में मृत घोषित लोगों में अपने हक की लडमई लडम्ने की प्रेरणा पैदा करने के लिए उन्होंने पिछले 30 जून को ‘पुनर्जन्म दिवस’ मनाया।वह कहते हैं कि पुनर्जन्म दिवस मनाने के पीछे उनकी एक ही मंशा है कि लोग सतर्क रहें और साजिश का शिकार न हों। उन्हें जीवित रहते कोई मृतक घोषित न करवा सके।

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