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अब तो पाक करे कार्रवाईः कृष्णा

अब तो पाक करे कार्रवाईः कृष्णा

भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के आतंकवादियों को पालने पोसने के ‘इकबालिया बयान’ को अपने रुख की पुष्टि बताते हुए पड़ोसी देश को आगाह किया है कि अब तो वह आतंकवादियों के खिलाफ कमर कसकर कार्रवाई करे।

विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने भारत का यह रुख आज संसद में पेश करते हुए कहा कि पाकिस्तान में सर्वोच्च स्तर पर यह स्वीकारोक्ति कर ली गई है कि वह तात्कालिक लाभों के लिए आतंकवादियों को पालता पोसता रहा था। कृष्णा ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति के इस बयान के बाद हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान अब तो आतंकवादियों के खिलाफ पूरी ताकत से कार्रवाई करेगा।

संसद के दोनों सदनों में कृष्णा ने पड़ोसी देशों के बारे में एक बयान अपनी ओर से पेश किया और राज्यसभा में सदस्यों के सवालों के जवाब में स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत तो हमेशा कहता रहा है कि पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल उसके खिलाफ हमले करने के लिए हो रहा है और पाकिस्तान के नेता यह वादा भी करते रहे हैं कि वे ऐसा नहीं होने देंगे।

उन्होंने विपक्ष के नेता अरुण जेटली के इस बयान से पूरी सहमति जताई कि पाकिस्तान ने झेंपते हुए यह बात स्वीकार कर ली है कि उसकी धरती से भारत पर हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत का यह स्पष्ट मानना है कि जो आतंकवादी तत्व हमारे खिलाफ कार्रवाई करते हैं वे आखिरकार एक दिन पाकिस्तान को भी निशाना बनाएंगे। उन्होंने कहा कि हम सीमा पार के अपने मित्रों को यही विनम्र नसीहत देना चाहते हैं।

श्रीलंका द्वारा भारतीयों मछुआरों को पकड़े जाने संबंधी सवालों के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार कच्चातिवू द्वीप के आसपास मछली पकड़ने के बारे में श्रीलंका सरकार के साथ कोई सहमति बनाने का प्रयास करेगी। मछुआरों के हितों की रक्षा का वादा करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय की स्थिति तो यह है कि कच्चातिवू श्रीलंका का क्षेत्र है लेकिन उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए आपसी समझबूझ बनाई जा सकती है।

इससे पहले सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने विदेश मंत्री से यह जानना चाहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के मद्देनजर यह माना जाए कि दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू होने वाली है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने ऐसे बयान फिर दिए है कि कश्मीर भारत और उसके बीच विवाद का मुख्य बिंदू है।

अन्नाद्रमुक के वी मैत्रियान ने श्रीलंका में तीन लाख विस्थापित तमिलों का मुद्दा उठाते हुए उनके तुरंत पुनर्वास, राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने और अंतिम प्राथमिकता चुनाव कराने का सुझाव दिया। उन्होंने विदेशमंत्री से जानना चाहा कि स्थिति का जायजा लेने के लिए क्या वह स्वयं श्रीलंका जाएंगे।

माकपा के सीताराम येचुरी ने बांग्लादेश में तिपाईमुर्द में प्रस्तावित बांध के चलते उत्पन्न विवाद का उल्लेख किया। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को नेपाल के आंतरिक मामले पर चर्चा नहीं करनी चाहिए।

भाजपा की डा नजमा हेपतुल्ला ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री स्तर पर पाकिस्तान के साथ बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच विदेश सचिवों के स्तर की बातचीत का अब क्या महत्व रह गया है। उन्होंने नेपाल के साथ खुली सीमा का मुद्दा उठाया और कहा कि समाचार पत्रों के अनुसार चीनी माल वहां से तस्करी के जरिए भारत लाया जा रहा है जो आर्थिक मंदी के इस दौर में हमारे बाजारों के लिए काफी हानिकारक है।

कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने कहा कि पाकिस्तान ने रणनीति के हिसाब से आतंकवाद को बढ़ावा दिया है। इस बात को उसके वर्तमान और पूर्व राष्ट्रपति कबूल चुके है तो पाकिस्तान से पूछा जाना चाहिए कि उसकी न्यायपालिका अभी भी आतंकवादी संगठनों को संरक्षण क्यों दे रही है।

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