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कोचिंग स्कॉलरशिप को धन्यवाद

हिन्दुस्तान कोचिंग स्कॉलरशिप प्रोग्राम ने आर्थिक रूप से कमजोर होनहार बच्चों के लिए मेडिकल और इंजीनियरिंग की निशुल्क व्यवस्था करके, आर्थिक रूप से पिछड़े विद्यार्थियों के मन में अपने इंजीनियर और डॉक्टर बनने के सपने में रंग भर दिए हैं जो शायद वो हिन्दुस्तान की मदद के बिना पूरा न कर पाते। झारखंड, बिहार, दिल्ली व उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त अन्य राज्यों में यह व्यवस्था प्रदान की जानी चाहिए। समाज में चल रहे एनजीओ और अन्य शैक्षिक संस्थाओं से अनुरोध करता हूं कि वे भी इसमें भागीदारी करें, ताकि समाज के हर तबके के विद्यार्थी अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर सकें। जिस प्रकार सूर्य अपनी रोशनी अमीर-गरीब पर बिना किसी पक्षपात के देता है उसी प्रकार ज्ञान, काबिलियत मेहनत को तराशना चाहिए।

शक्तिवीर सिंह स्वतंत्र, जामिया, दिल्ली

बढ़ते संस्थान, घटती प्रतिभा

हमारे देश में प्रति वर्ष हजारों छात्र बी.टेक या एम.टेक की डिग्री हासिल करते हैं। पर विज्ञान व तकनीकी में हमारा देश लगातार पिछड़ता जा रहा है। अभी हाल ही में मुंबई में सी-लिंक पुल के निर्माण में मुख्य रूप से चीनी विशेषज्ञों की मदद ली गई, जबकि हमारे देश में प्रतिवर्ष हजारों सिविल इंजीनियर तैयार हो रहे हैं। दिल्ली मेट्रो भी विशुद्ध रूप से आयातित तकनीकी पर आधारित है। इस प्रोजेक्ट में भारतीय के नाम पर श्रीधरन महोदय हैं, जो 65 वर्ष की उम्र के हैं। देश के हजारों युवा आर्किटेक्ट इंजीनियरों में किसी में भी वह कूवत नहीं दिखती कि वे श्रीधरन की जगह ले सकें। हमारे आस-पड़ोस के बिजली मिस्त्री या राजमिस्त्री, इन आईआईटीएन से ज्यादा कुशल और प्रवीण होते हैं, भले ही पुस्तक ज्ञान में वे कोरे हों।

विनोद कुमार शुक्ला, नेहरू विहार 

सराहनीय रेलमंत्री

संसद में वर्ष 2009-10 का रेल बजट रेलमंत्री ममता बनर्जी ने देश के गरीब, मध्य वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर सराहनीय ढंग से पेश किया है। उसके लिए मैं देशवासियों की ओर से हार्दिक धन्यवाद देता हूं। इसमें कोई शक नहीं कि रेल बजट में हर वर्ग के हितों का गंभीरतापूर्वक ध्यान रखा गया है।

देशबन्धु, उत्तमनगर, नई दिल्ली

मूल समस्या, जनसंख्या

बीते 50 वर्षो में भारत की आबादी बहुत बढ़ चुकी है। पृथ्वी पर सीमित साधन है और जनसंख्या असीमित हो चुकी है। ऐसे में कोई भी सरकार क्यों न आए, संसाधनों का समान वितरण करने में असमर्थ है। बढ़ता भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी, बिजली-पानी की कमी, युवा वर्ग में
असंतोष की प्रवृत्ति सभी समस्याओं के मूल में जनसंख्या वृद्धि ही है।

सारिका चौधरी, लक्ष्मी नगर, दिल्ली

सावन को आने दो
तुझे गीतों में ढालूंगा
बीवी को मैके तो जाने दो
सावन को आने दो

शरद जयसवाल, कटनी, म. प्र.

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