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ठहराव से आगे

दुनिया के संपन्न और शक्तिशाली देश समस्याओं को बखूबी समझते हुए उसकी विधिवत व्याख्या कर रहे हैं, पर उसे विश्व की बाकी उभरती हुई ताकतों के साथ मिलकर कैसे हल किया जाए, इसका रास्ता नहीं निकाल पा रहे हैं। इसकी वजह है कि उभरती वैश्विक चुनौतियों के आगे पुरानी पड़ चुकी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और व्यवस्थाओं से अब काम चल नहीं रहा है, फिर भी उन्हें बदलने की राजनीतिक तैयारी दिखती नहीं। पुरानी मानसिकता के इसी फ्रेम से बाहर न आ पाने के कारण इटली के लाक्विला में चल रही जी-8 समूह की बैठक में विकासशील देशों से आम राय बनने के बजाय मतभेद और ठहराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस बैठक में जो तीन प्रमुख मुद्दे उभर कर आए हैं, वे हैं आर्थिक मंदी, जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा। इनमें किस पर ज्यादा जोर दिया जाए, इसको लेकर आम राय नहीं है। इन्हें हल करने की सैद्धांतिक रूपरेखा और उसकी व्यावहारिक जिम्मेदारियां तय करने में मुश्किलें आ रही हैं। गुरुवार को जी-8 देशों के बयान में स्वीकार किया गया है कि आर्थिक मंदी का बुरा वक्त गुजर गया है और अब हर जगह सुधार दिख रहा है। बस बैंकिंग प्रणाली, उत्पादक कंपनियों और बेरोजगार हुए लोगों की मदद करते रहना है। यानी संपन्न देश विश्व बैंक और मुद्रा कोष जैसी वैश्विक संस्थाओं के ढांचे में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं महसूस कर रहे हैं। दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ के लौट आने के बाद ब्राजील, मैक्सिको और दक्षिण अफीका की तरफ से असहमति का झंडा बुलंद किएभारत ने साफ कहा है कि मंदी ही नहीं, जलवायु परिवर्तन के लिए भी विकसित देश जिम्मेदार हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारियां निभानीं चाहिए। जलवायु परिवर्तन और उसके साथ पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी के व्यापार का मुद्दा इस बैठक में ठहराव के प्रमुख कारण हैं। सन् 2050 तक कार्बन उत्सजर्न को 50 प्रतिशत कम करने के सवाल पर आधार वर्ष को लेकर विवाद है। भारत, चीन और यूरोपीय देश चाहते हैं कि इसका आधार वर्ष 1990 रखा जाए तो अमेरिका और जपान इसे 2005 तक ढकेलना चाहते हैं। इस बीच विकसित देश ग्रीन प्रौद्योगिकी के व्यापार से लाभ उठाना चाहते हैं, जबकि विकासशील देश 100 अरब डॉलर के इस काम में उनसे सरकारी मदद चाहते हैं। ठहराव की यह स्थितियां पूरी दुनिया को नुकसान पहुंचाने वाली हैं, क्योंकि इससे संकट नहीं ठहरेगा, इसलिए छोटे समूहों में उलझे इन तारों को और बड़े मंच के साथ बड़ी समझ से सुलझने का प्रयास करना चाहिए।

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