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एच1 एन1

आजकल जिस स्वाइन फ्लू ने परेशानी खड़ी कर रखी है, उसका नाम है एच1एन1 वायरस। यह बीमारी सूअरों में होने वाली श्वसन तंत्र की बीमारी है। इस वायरस में हिमाग्लुटिनिन और न्यूरामिनिडेज नाम के प्रोटीन होते हैं, इन्हीं की वजह से इस वायरस का नाम एच1एन1 रखा गया है। एच1एन1 उन्हीं लोगों में देखने में आया है जो सूअरों के करीब रहते हैं। फिर यह वायरस एक इनसान से दूसरे तक फैल जाता है।

कैसे संक्रमित करता है?
- सूअरों के सम्पर्क में आने से या फिर ऐसे माहौल में रहने से जो स्वाइन फ्लू के वायरस से प्रदूषित हो।
-  ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में आने से जो स्वाइन फ्लू से ग्रस्त है। एक व्यक्ति से दूसरे तक यह ऐसे ही पहुँचता है जैसे मौसमी फ्लू फैलता है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं बुखार, खाँसी, गला खराब, शरीर में पीड़ा, सिरदर्द, ठंड या थकान। कुछ लोगों को अतिसार एवं उल्टी की शिकायत भी रहती है। इसके लिए एंटी वायरल दवाएं प्रयोग की जा सकती हैं। यदि बुखार बढ़े तो पैरासीटामोल के साथ इन दवाओं के सेवन से ताप कम किया जा सकता है। 

कैसे निपटें
किसी व्यक्ति को सूअर का मांस खाने से स्वाइन फ्लू नहीं हो सकता। यह मुख्यत: उस व्यक्ति के सम्पर्क में आने से फैलता है जो इस वायरस से ग्रस्त हैं। एंटी वायरल दवा से ज्वर कम कर सकते हैं। कुछ मामलों में यदि ज्वर अधिक है तो ठंडे पानी की पट्टियां माथे पर रखें। रोगी को तरल पदार्थ दे सकते हैं। चूंकि इस फ्लू के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं, इसलिए सावधानी बरतें।

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