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कहां तक सुरक्षित हैं हम

सदैव आपकी सेवा में तत्पर का नारा देने वाली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था हमें सुरक्षा देने में कहां तक सक्षम है। वो भी ऐसे समय में जब इसी के संरक्षण में हम खुद को ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कभी इनके हाथों एनकाउंटर के नाम पर किसी निदरेष के मारे जाने की खबर समाने आती है तो कभी जरूरत पड़ने पर इनका घटनास्थल पर न पहुंचना अखरता है। कुछ ही दिन पहले नोएडा के दो वर्दीधारियों द्वारा एक युवक से लूट के आरोप में सजा मिली। साथ ही यह भी सामने आया कि सजा पाने पर उसने अपने थाने के ही कुछ और वर्दीधारियों का नाम लिया जो वर्दी की आड़ में ऐसे कृत्यों को अंजाम देते हैं और हमेशा बच निकलते हैं। ऐसे में है कोई बताने वाला कि आम जनता किसके भरोसे पर खुद को सुरक्षित महसूस करे, जबकि सुरक्षा देने वाले खुद ही लोगों के लिए असुरक्षा का सबब बन रहे हों।

साधना मिश्र, अशोक नगर, नई दिल्ली

पानी बचाओ, जीवन बचाओ

आजकल इतनी भीषण गर्मी पड़ रही है कि समस्त जीव-जंतु, पेड़-पौधे और मनुष्य बिलबिला रहे हैं। फिर भी हम कुछ भी सीख नहीं पा रहे, कुछ भी अच्छा प्रयास भविष्य के लिए नहीं कर रहे हैं। समस्या जब तक हल नहीं होगी, जब तक प्रत्येक गांव, शहर, कस्बे तथा नगर में एक-एक तालाब नहीं होगा। जोहड़ का होना हमारे नगर गांव में होना बहुत जरूरी है। जिससे काफी हद तक वर्षा के जल का संचयन हो जता है। जो पूरे वर्ष पशु-पक्षी, जीव-जंतुओं के काम आता है। उसके आस-पास का जल स्तर बना रहता है। वर्षा के पानी को संचयन करने की व्यवस्था शहरों का विकास करने के साथ-साथ बहुत जरूरी है। जागो अब भी जगो विकास के लिए पानी बचाओ।

शिव प्रकाश शर्मा, हापुड़

बजट के बहाने प्रणव दा

यूपीए सरकार की वापसी के बाद प्रणव दा जनता को बजट के बहाने धन्यवाद देते दिखे। वोटर्स को शुक्रिया करने का इससे बेहतर और कोई मौका नहीं था। प्रणव दा ने इस बार ग्रामीण भारत को खुश करने की पुरजोर कोशिश की है। जबकि शहरी भारत जिसे हम इंडिया कहेंगे, उनके लिए कुछ खास राहत नहीं। हर बार उद्योग जगत पर मेहरबान बजट को देख ऐसा लगता है कि आखिर सरकार को यह एहसास हुआ कि जब तक ग्रामीण भारत का विकास नहीं तब तक इंडिया सुपर पावर नहीं।

मनु त्यागी, गाजियाबाद

नहीं दिखता मान-सम्मान

पिछले दिनों राजधानी में सड़कों पर पैदल चलने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए 1 जून से 7 जून तक दिल्ली पुलिस द्वारा पैदल यात्री सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया, जबकि दिल्ली में पैदल यात्रियों के सभी अधिकार लगभग पूर्णतया छिन चुके हैं। दिन हो या रात छोटे-बड़े वाहन चालक शराब पीकर तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाते हुए अक्सर दुर्घटनाएं करते हैं।  पैदल यात्रियों के अधिकारों का मान-सम्मान तो किसी भी सूरत में होता नहीं दिखता।

रोशन लाल बाली, महरौली, नई दिल्ली

जादू

झुकी
आंखों का जादू है
रुकी
सांसों का जादू है
अक्स
शबनम से भीगा है
फकत
फांकों का जादू है।

शरद जयसवाल, कटनी, मध्य प्रदेश

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