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सफेद दाग

सफेद दाग विचलित कर देने वाला विकार है, पर हरेक सफेद दाग एक सा नहीं होता। कुछ त्वचा पर पड़े दबाव, किसी कपड़े से हुई एलर्जी, संक्रमण या अन्य कारणों से होते हैं, तो कुछ शरीर की इम्यून प्रणाली के बागी होने से उपजते हैं। यह स्थिति विटिलिगो या ल्यूकोडर्मा कहलाती है, जिसे लोग फुलवैरी या गलती से कच्चा कोढ़ भी कह देते हैं।

मछली खाकर दूध पीना : आम सोच है कि मछली खाने के तुरंत बाद अगर दूध पिया जाए तो सफेद दाग हो जाते हैं, पर यह गलत है।

लेप्रेसी और सफेद दाग : बदन के किसी हिस्से से रंग गायब होना रंग-कोशिकाओं (मेलेनिन सेल) के काम न करने से होता है। दरअसल, उस हिस्से की रंग-कोशिकाएं हड़ताल पर चली जाती हैं। यह कोढ़ नहीं।

अन्य कारण : साड़ी कसकर बांधने से पेट पर दाग उभर सकते हैं। चोट या जलने के बाद नई त्वचा आने पर भी कभी-कभी त्वचा बदरंगी हो जाती है। कुछ रसायन, धातु और दूसरी चीजें भी नुकसान पहुंचाती हैं। रबर की चप्पलें, दस्ताने और ब्रा स्ट्रैप भी समस्या पैदा कर देते हैं। परेशानी माथे की बिंदी, घड़ी के स्ट्रैप या आभूषणों से भी हो सकती है।

कैसे बने त्वचा सलोनी : उपचार के लिए ऐलोपैथी में बहुत सी दवाएं हैं। कुछ खाने की, तो कुछ लगाने की। सोरालेन, कोर्टिको स्टीरॉयड और लेवामिसोल दवा लेने या लगाने के बाद अल्ट्रावॉयलेट किरणों से उपचार करने पर त्वचा का रंग धीरे-धीरे सामान्य होता जाता है।

किसी विशेषज्ञ से उपचार कराया जाए तो लगभग 50 प्रतिशत मामलों में दाग मिट जाते हैं, लेकिन यह सुधार धीरे-धीरे होता है। दागों को कॉस्मेटिक्स के इस्तेमाल से छुपाया भी जा सकता है। धूप में जाना हो तो बचकर रहें। क्या विटिलिगो छूत का रोग है? यह सच है कि एक-तिहाई मरीजों के रक्तसंबंधियों को भी यह रोग होता है, पर यह संयोग जेनेटिक है।

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