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मोबाइल का बीमा

आज के दौर में हर व्यक्ति मोबाइल का इस्तेमाल करता है। वैसे आमतौर पर लोग मोबाइल का इंश्योरेंस नहीं करवाते, लेकिन दिन-ब-दिन बढ़ रही मोबाइल चोरी की घटनाओं के मद्देनजर मोबाइल का इंश्योरेंस कराना जरूरी होता जा रहा है।

- मोबाइल फोन में कई तरह के रिस्क होते हैं। मसलन खोने, चोरी होने, किसी दुर्घटना में क्षतिग्रस्त होने सरीखी कई घटनाएं होती रहती हैं।

- चोरी होने और खोने के बदले मिलने वाला मुआवजा मोबाइल के वास्तविक मूल्य से कम होता है।

- मुआवजा इस पर निर्भर करता है कि वर्तमान में मोबाइल के दाम में कितनी कमी आई थी। उदाहरण के तौर पर आपने जब मोबाइल खरीदा था, तब उसका दाम पंद्रह हजार था, लेकिन वर्तमान में उसका दाम अगर घटकर दस हजार रुपए हो गया है, तो मिलने वाले मुआवजे की दर उसी के अनुसार निर्धारित होगी।

- मुआवजा देते वक्त कुछ और बातों का ध्यान रखा जाता है। मसलन अगर आप अपने मोबाइल को खुली कार में छोड़कर चले गए और वह चोरी हो गया, तो क्लेम देते वक्त ये बात जेहन में रहती हैं। 

- मोबाइल में किसी क्षति के वक्त ये जांच की जाती है कि कहीं आपने अतिरिक्त डाटा तो लोड नहीं कर रखा, जिसकी वजह से मोबाइल खराब हुआ हो। वहीं मोबाइल के पानी में गिरने का भी क्लेम नहीं दिया जाता।

- कई इंश्योरेंस कंपनियां मोबाइल का इंश्योरेंस करती हैं। इसके अलावा मोबाइल कंपनियों के भी इंश्योरेंस कंपनियों से करार होते हैं, जिससे आपको इंश्योरेंस कवर मोबाइल मिलता है।

- ध्यान रखने वाली बात है कि कंपनियां इंश्योरेंस कवर तो फ्री करती हैं, लेकिन इसमें बैटरी, चाजर्र सरीखी चीजें कवर नहीं होती।

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