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दो टूक

मरीज को ऑपरेशन टेबल पर लिटाओ, चीराफाड़ी शुरू करो और फिर उसी हालत में छोड़ दो! इस दलील के साथ कि जब अमेरिका से इंजेक्शन आएगा तब ऑपरेशन पूरा करेंगे। दिल्ली में मल्टीलेवल पार्किग नाम के ऐसे कई मरीज ऑपरेशन पूरा होने के इंतजार में हैं। चार मल्टीलेवल का शिलान्यास हो चुका है।

जमीन कब्जे में लेकर तोड़फोड़ भी हो गई। लेकिन बस उसके बाद सब थम गया। इतना धीमा काम कि देखकर कछुआ भी शरमा जाए। दलील यह कि पहले टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी। सवाल है क्या टेंडर प्रक्रिया तीन साल तक पूरी नहीं होती? क्या शिलान्यास से पहले टेंडर नहीं निकाले जा सकते थे? इलाके की पब्लिक का क्या कसूर है, जिसके पास की जमीन भी रिजर्व हो गई और जिसे नई पार्किग भी नहीं मिली? लंच अगर डिनर तक टल जाए तो खाने का मजा रहेगा क्या?

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