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बेवजह थकान से चूर? कहीं ‘सीएफएस’ की बीमारी तो नहीं!

क्या आपको रात में जी भर कर सो लेने के बाद भी अगले दिन मानसिक थकान, बदन में टूटन और बिलकुल बेजन हो जाने का अनुभव होता है? तो हो सकता है, आप ‘क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम’ यानी सीएफएस नाम की बीमारी के शिकंजे में आ गए हों। मैक्स हैल्थकेयर, दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सुषुम शर्मा के मुताबिक, ये बीमारी भारत में ज्यादातर शहरी आबादी को तेजी से अपना शिकार बना रही है। वे कहते हैं: अगर थकान और टूटन के लक्षण दो हफ्ते से भी ज्यादा दिनों तक जरी रहें, तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

सीएफएस है क्या?
भीषण थकान की स्थिति में मरीज को लगता है कि उसका शरीर बिलकुल बेजान हो गया है। उसकी तबियत कुछ भी करने की नहीं होती। हरदम मन करता है कि बिस्तर पर पड़े रहें। किसी भी काम में मन नहीं लगता। छोटे-मोटे रोजमर्रा के फैसले करना भी पहाड़ चढ़ने जसा मुश्किल काम लगता है, और कई दिन तक मन बुझ-बुझ रहता है। डॉ. शर्मा स्पष्ट करते हैं : कई बार सीएफएस के मरीज असामाजिक व्यवहार भी करने लगते हैं, और कहते हैं कि उन्हें दोस्तों की संगत भी नहीं सुहा रही। वे बिलकुल अकेले रहना चाहते हैं।

ऐसे लक्षण मरीज में किसी अंदरूनी मेडिकल समस्या की वजह से भी हो सकते हैं, और मानसिक परेशानी की वजह से भी। मानसिक कारणों से भी कई बार शरीर बेजान लगने लगता है। इसके अलावा, गलत जीवन शैली (जैसे बहुत कम या बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत, नींद और खानपान की गड़बड़ या अक्सर लंबे सफर करने की आदतें) भी इस बीमारी को जन्म दे देती हैं। मानसिक थकान की वजह से सिर दर्द, ब्लड प्रैशर में उतार-चढ़ाव और कई मामलों में पूरे बदन या कुछ हिस्सों में दर्द का अहसास होता है।

जबकि शारीरिक थकान की आम वजह मांसपेशियों की जरूरत से ज्यादा कवायद होती है, जिसका आसान इलाज आराम करना है। लेकिन सर गंगाराम अस्पताल, दिल्ली के आर्थोपेडिक्स और स्पोर्ट्स मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. प्रतीक गुप्ता कहते हैं कि अगर मांसपेशियों में दर्द लगातार जारी रहे, तो इसकी असली वजह मालूम करना बेहद जरूरी हो जाता है। आमतौर पर सीएफएस के मरीज शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द और मांसपेशियां कमजोर होने की शिकायत करते हैं।

सीएफएस के तकरीबन 20 प्रतिशत मरीजों की परेशानी की मूल वजह थकान ही होती है। डॉ. शर्मा कहते हैं : ऐसे मरीजों के आते ही हम उनका बीपी और टेम्परेचर जरूर चेक करते हैं। अगर कोई महिला, जिसकी उम्र 30 से ऊपर है, लगातार थकान की शिकायत करती है, तो उसको थायरॉयड की गड़बड़ी भी हो सकती है।

अगर 40 से बड़ी उम्र की महिला है, तो ये मैनोपॉज की वजह से भी हो सकता है। डॉ. शर्मा ने लगातार थकान से पीड़ित एक मरीज की मिसाल दी, जिसकी जांच में खुलासा हुआ कि उसे हल्का बुखार रहता था, और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन भी था। इस महिला को एंटी-बायोटिक्स का पूरा कोर्स देने पर ही थकान की समस्या से छुटकारा मिल पाया।

दूसरी ओर कई मरीज ऐसे भी होते हैं, जिन्हें मेडिकल टेस्ट में क्लीन चिट मिल जाती है, लेकिन बदन दर्द और थकान की समस्या बनी रहती है। इनकी थकान की वजह नॉन-मेडिकल होने की संभावना होती है। डॉ. गुप्ता कहते हैं : आमतौर पर ऐसे मरीजों का इलाज कुछ काउंसलिंग देकर, कुछ दवाएं खिलाकर, थोड़ी कसरत करवा कर और जीवन शैली में सुधार करके करना पड़ता है।

थकान के 8 कारण
- थायरॉयड की गड़बड़ी : ज्यादातर महिलाओं में देखने को मिलती है। इसका पता वजन घटते जाने, थकान महसूस करने, बालों और त्वचा में खुश्की आने और बार-बार सर्दी-जुकाम होने से लगता है।

- एनीमिया : महिलाओं, खासकर गर्भवती महिलाओं में थकान का प्रमुख कारण खून की कमी होता है।

- डिप्रैशन : जांच के बगैर पक्के तौर पर नहीं कह सकते, लेकिन अगर फैमिली हिस्ट्री में ऐसा है, तो अवसाद भी एक कारण हो सकता है।

- पोषण की कमी : खासकर विटामिन बी-2, बी-6, बी-12, विटामिन ई, मैग्नेशियम और जिंक की कमी से।

- फूड एलर्जी : मसलन गेहूं, जौ और ओट्स में मौजूद ग्लूटन से कई लोगों को कोलिएक नामक बीमारी हो जती है, जिसमें थकान भी महसूस होती है।

- गलत जीवन शैली : बुरी तरह थके व्यक्ति कसरत करने से जी चुराते हैं, जबकि कसरत करने से उनमें नई जान आ सकती है।

- स्लीप एप्नीया : कई लोगों को पता ही नहीं होता कि उन्हें नींद के दौरान सांस टूटने की ये बीमारी है। इसलिए वे थकान महसूस करते हैं।

- तनाव : शहरी आबादी के काम करने के गैर कुदरती तौर तरीके तनाव को जन्म देते हैं, जिससे थकान और टूटन महसूस होती है।

थकान को मात देने के 10 उपाय

- सही खाना : ताजे फल और सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करेंगे, और विटामिन से भरपूर खुराक लेंगे, तो थकान नहीं होगी।

- पीते रहना : प्यास लगने की नौबत ही न आने दें। इससे पहले कि शरीर खुश्की की गिरफ्त में आकर पानी मांगे, पानी, ज्यूस, नारियल, शिकंजी, छाछ या दूध पीते रहिए।

- गोली खाना : कभी-कभी एकाध हफ्ते के लिए मिनरल्स के साथ मल्टी-विटामिन टैब्लेट्स की डोज लेने में बुराई नहीं है। अगर असर ठीक हो, तो डॉक्टर से खुराक दुरुस्त करने के बारे में राय लें।

- भरपूर नींद : एक हफ्ते तक रोज छह से आठ घंटे की नींद लेकर देखें। अगर थकान कम हो जाए, तो इसे आदत बना लें।

- संतुलन : शहर के लोग जरूरत से ज्यादा तनाव को न्यौता देते हैं। ठीक से खाते नहीं, सफर करते रहते हैं, और अव्यावहारिक टारगेट बनाकर पूरा करने में पिले रहते हैं। अरे भाई, आप महामानव नहीं हैं। बैलेंस रख कर चलिए न!

- हैल्थ चेक : अपने परिवार की हैल्थ हिस्ट्री देखकर अपना चेकअप नियमित करवाते रहें। थायरॉयड टेस्ट भी जरूरी है।

- लक्षण देखें : शरीर या मन में कोई भी असामान्य लक्षण नजर आए, तो अनदेखी न करें। डॉक्टर किसलिए हैं?

- भूख और वजन : भूख और वजन में बदलाव पर गौर करें। भूख न लगे और थकान हो, तो इन्फैक्शन और भूख बढ़ जाए, तो डायबिटीज हो सकती है। इनसे सावधान रहें।

- कैलेंडर देखें : थकान का चक्र  किन खास महीनों या दिनों में आता है, इसे नोट करें। ये खास मौसम, ज्यादा सफर या आबोहवा में बदलाव का नतीजा तो नहीं?

- भीतर झांकें : मानसिक तनाव है, तो रिलेक्सेशन थरेपी लें। काउंसलिंग, योग और ध्यान का सहारा लें। शांत स्वभाव बनाकर रखें।

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