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शहर के लोग नहीं ले रहे लाडली का लाभ

 कुछ सरकारी योजनाएं शहर के पढ़े लिखे लोग भी नहीं समझ पाते। लाडली का हाल साइबर सिटी में कुछ ऐसी ही योजनाओं की तरह हो गया है। दूसरी बेटी के  जन्म पर महिला एवं बाल विकास विभाग के लाडली योजना का लाभ शहर के लोग नहीं ले रहे। यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के  जन्मदिन पर 20 अगस्त 2005 में शुरू हुई थी। शहरी क्षेत्र के लोग इस योजना को गरीबी रेखा के नीचे के लोगों की योजना समझते हैं। भ्रम की स्थिति ने लाडलियों को इसके लाभ से वंचित रखा है।

लाडली की योजना किसी भी जाति के किसी भी आयवर्ग के लोगों पर लागू होती है। इसके अनुसार 20 अगस्त 2005 के बाद अगर किसी भी व्यक्ति की दूसरी बेटी हुई हो तो वह बेटी इस योजना में शामिल हो सकती है। दूसरी बेटी से यह मतलब भी नहीं है कि उस व्यक्ति को बेटा नहीं हो। इस योजना का बेटों की संख्या से भी कोई मतलब नहीं हैं। दूसरी बेटी के जन्म पर सरकार हर साल उसके नाम पांच हजार रुपये जमा करती है। पांच साल तक यह राशि सरकार जमा करती है। जब लड़की 18 साल की होगी तो उसे लगभग 90 हजर रुपये सरकार की ओर से मिलेंगे। इसमें जति, आय या लड़कों की संख्या बाधक नहीं है। इस संदर्भ में महिला एंव बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी सुनयना ने बताया कि जिले के शहरी  क्षेत्र से बहुत कम लोगों ने इस योजना के  लिए आवेदन किया है। लोगों के बीच यह भ्रम है कि यह योजना गरीबों के लिए है जबकि इसका आय से कोई लेना-देना नहीं है।

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