class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दंगे और दीवार

चीन की मजबूत दीवार के पार से अचानक ही जो खबरें आई हैं, वे चौंकाने वाली हैं। विडंबना देखिए, सिनजियांग प्रांत में दंगे, 156 लोगों के मरने के समाचार, तस्वीरें और वीडियो वगैरह सिर्फ इसलिए मीडिया में आ सके, क्योंकि चीन की सरकार विदेशी पत्रकारों को वहां यह दिखाने के लिए ले गई थी कि सब कुछ शांत है, जब पत्रकार दौरा कर रहे थे तभी दंगे भड़क उठे। सोमवार की इस घटना के बाद क्या हुआ हमें नहीं पता, चीन के इस सुदूर इलाके में अब मीडया को जाने की इजाजत नहीं है, इस इलाके के इंटरनेट और फोन संपर्क काट दिए गए हैं।

चीन के इस प्रांत में क्या हुआ और क्या हो रहा है, इसे समझना आसान नहीं है। तमाम आर्थिक प्रगति और आधुनिकीकरण के बाद भी चीन ने अभी अपने समाज के खिड़कियां और दरवाजे नहीं खोले हैं। सिनजियांग जैसे प्रांत में तो प्रगति और आधुनिकीकरण भी नहीं पहुंचे हैं। यहां से असंतोष की खबरें अक्सर ही आती रही हैं और यह भी कि चीन-तिब्बत की तरह इस इलाके की आबादी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। सिनजियांग के मूल निवासी तुर्की पृष्ठभूमि के मुसलमान हैं, लेकिन यहां चीनी मूल के लोगों को भारी तादाद में बसाया है। इलाके के मूल निवासियों के दमन की खबरें भी आती रही हैं।

चीन की सरकारी खबरों में कहा गया है कि उग्रवादी गुटों ने यहां के चंद मूल निवासियों को चीनी मूल के लोगों के खिलाफ भड़काया और उन्होंने चीनी मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा शुरू कर दी। अभी यह कहना मुश्किल है कि वाकई दंगे का कारण तात्कालिक है या फिर भेदभाव के खिलाफ लोगों के मन में बरसों से पल रहा गुस्से का अचानक फूटना। या फिर मानवाधिकारों की मांग कर रहे लोगों के दमन से हालात यहां तक पहुंच गए।

चीन की सरकार का कहना है कि कुछ इस्लामिक उग्रवादी संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं, यह भी मुमकिन हैं, क्योंकि जहां लोगों को अपने जायज गुस्से को व्यक्त करने के मंच नहीं मिलते, वहां इस तरह का अतिवाद भी अपनी जमीन तैयार कर सकता है। मुमकिन है कि चीन तिब्बत की तरह ही फिलहाल सिनजियांग के असंतोष को भी दबा ले, लेकिन जब तक चीनी समाज में लोगों को मानवाधिकार नहीं मिलते और समाज में खुलापन नहीं आता, इस तरह के कभी भी फट पड़ने वाले असंतोष वहां पनपते रहेंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दंगे और दीवार