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ढाई करोड़ का पुल 24 लाख में कैसे बनेगा?

ढाई करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला पुल 24 लाख में कैसे बनेगा? राज्य सरकार इसकी निगरानी जांच कराएगी। ग्रामीण कार्य मंत्री वृशिण पटेल ने सोमवार को रामचंद्र प्रसाद के तारांकित प्रश्न के जवाब में यह घोषणा की। प्रश्न बिहारशरीफ के दीपनगर गांव के निकट से राजगीर जानेवाली जर्जर सड़क और उसपर ध्वस्त पुलिया से जुड़ा था। प्रसाद ने सरकार से पूछा था कि क्या सरकार सड़क और पुलिया की मरम्मत कराना चाहती है?

इस पर मंत्री ने कहा कि पुल की मरम्मत का आकलन करने पर पता चला है कि उसपर करीब दो से ढाई करोड़ रुपए खर्च होंगे। पर, उसका जो प्राक्कलन तैयार किया गया वह महज 24 लाख रुपए का है। उन्होंने कहा कि जब पुल बनाने में ढाई करोड़ खर्च होंगे तो प्राक्कलन 24 लाख का कैसे तैयार हुआ? सरकार इसकी निगरानी से जांच कराएगी।


वहीं वासुदेव सिंह के तारांकित प्रश्न पर भी मंत्री ने निगरानी जांच की घोषणा की। मामला दरभंगा स्थित चंद्रधारी मिथिला विज्ञान महाविद्यालय के परिसर में मिट्टी भराई एवं समतलीकरण से जुड़ा था। सिंह का सवाल था कि वर्ष 2007-08 में उन्होंने परिसर में मिट्टी भरायी और समतलीकरण के लिए दिया पार्षद एच्छिक कोष से दो लाख रुपए की अनुशंसा की थी लेकिन ठीकेदार परिसर को पहले से भी खराब स्थिति में पहुंचाकर चला गया। इसपर मंत्री ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिलाया।


दूसरी ओर वासुदेव सिंह के ही तारांकित प्रश्न के जवाब में ग्रामीण विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि मधुबनी के रहिका प्रखण्ड अंतर्गत ककरौल हॉस्पीटल के निकट मार्केट कॉम्प्लेक्स का आवंटन क्यों नहीं किया गया इसकी जांच का आदेश दिया गया है। मंत्री ने कहा कि विभाग के प्रधान सचिव को 24 घंटे में इसकी जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उसपर कार्रवाई की जाएगी।

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