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कांग्रेस का बजट कापरेरेट घरानों के लिए : सपा

समाजवादी पार्टी ने कहा है कि केन्द्रीय बजट से किसानों व आम जनता को राहत नहीं मिलने वाली है। महंगाई की बड़ी चुनौती से निबटने के लिए इसमें कोई संकेत नहीं है। गाँव, किसान, कुटीर और ग्रामोद्योग के हितों की अनदेखी की गई है। हमेशा की तरह कांग्रेस के वित्तमंत्री ने कार्पोरेट घरानों की इच्छाओं को पूरा करने में ज्यादा दिलचस्पी ली है।


सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि बजट में राजकोषीय घाटे की भरपाई का भी कोई संकेत नहीं है। वर्ष 2014-15 तक गरीबी हटाने का लक्ष्य रखा गया है जो इन्दिरा गांधी के नारे की याद दिलाता है। तब के नारे के बावजूद गरीबी तो नहीं हटी, अलबत्ता किसान आत्महत्या करने पर जरूर मजबूर होते रहे हैं। मंदी के शोर में तमाम लोगों की नौकरियां चलीं गईं लेकिन वित्तमंत्री 1.2 करोड़ नौकरी का लक्ष्य पाने का लक्ष्य पेश कर रहे हैं। वे नौ फीसदी विकास दर का सपना भी दिखा रहे हैं जबकि  वर्ष 2008-09 में यह छह फीसदी से ऊपर नहीं गई।

  
    गांव, किसान और गरीबों के लिए कोई सार्थक योजना नहीं दी है। किसानों के लिए कर्ज माफी का समय 6 माह बढ़ाने के साथ 3 लाख तक का और कर्ज देने का एलान तो कर दिया पर उस पर ब्याज दर 7 फीसदी लगा दी हैं जबकि सपा हमेशा 4 प्रतिशत ब्याज पर किसानों को कर्ज देने की मांग करती रही है। सपा प्रवक्ता ने कहा कि बजट से पहले ही सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा चुकी है। जो यह मान रहे थे कि लोकसभा चुनाव के बाद के पहले बजट में कुछ राहत मिलेगी, उन्हें मायूसी ही हाथ लगी है।

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