class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जो ज्यादा आसान है!

उम्मीद, मेरा प्रिय कर्म है। जब चाहें, जहां चाहें, जितनी चाहें और जिससे चाहें आप मुझसे उम्मीद करवा सकते हैं। मैं वक्त और सीजन के हिसाब से लोग चुनता हूं। उनके लिए मापदंड तय करता हूं और बताता हूं कि वे मेरी उम्मीदों पर खरे उतरे या नहीं। अभी-अभी बजट का सीजन खत्म हुआ है। ट्रेन बजट से पहले ममता बनर्जी से उम्मीद थी और आम बजट से पहले प्रणव मुखर्जी से। न बनर्जी मेरी उम्मीदों पर खरी उतरीं, न ही मुखर्जी।

ममता जी से उम्मीद थी कि वो फस्र्ट क्लास में डबल बेड लगवाएंगी, सेकेंड क्लास में एसी और साधारण डिब्बे में कूलर। मुङो पक्का यकीन था कि वो पच्चीस रुपये के पास में पैलेस ऑन व्हील्स का सफर भी शामिल करेंगी। सामान्य किराए पर तत्काल का टिकट देंगी! हर यात्री को मुफ्त खाना देंगी और ऐसा खाना खा बीमार पड़ने वालों की दवा भी करवाएंगी, मगर नहीं हुआ। किया उन्होंने ये कि पत्रकारों को टिकट में पचास फीसदी की छूट दे दी। ऐसा कर उन्होंने पत्रकारों पर एहसान नहीं किया, बल्कि रेलवे का ही पचास फीसदी नुकसान कम किया है!

वहीं, प्रणव दा से उम्मीद थी कि वो कर मुक्त आय की सीमा बीस लाख कर देंगे। कर चोरी से सीमा हटा देंगे। मेरे प्रिय फ्रूट लीची पर सब्सिडी दिलवाएंगे। उसकी कीमत पांच रुपये किलो कर देंगे। होटलों में पनीर-बटर मसाला की फुल थाली बीस रुपये करा देंगे। मल्टीप्लेक्स का टिकट दस का करवा देंगे और तीस रुपये के महंगे मिनरल वाटर से बचाने के लिए पिक्चर हॉल में ही हैंडपंप लगवा देंगे, मगर ऐसा भी नहीं हुआ।

मुझे उम्मीद थी कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण नहीं करेगा, शादी से पहले सानिया मिर्जा विम्बल्डन के सेमीफाइनल में पहुंचेंगी, प्रीतम अपनी फिल्मों में कुछ अपना भी संगीत देंगे। पड़ोसी मंगलू की नई जरसी गाय बीस लीटर दूध देगी, उसका बेटा आडूराम दसवीं में नब्बे फीसदी अंक लाएगा, उसकी बहन कचरा देवी अपने ससुराल से मेरे लिए नया स्वेटर लाएगी, मगर ये भी नहीं हुआ।

मन भारी हो गया है। गुस्से और अवसाद से घिर गया हूं। दिल कर रहा है, मिट्टी का तेल डाल पूरी दुनिया को आग लगा दूं और सारे अग्निशमन यंत्र दरिया में फेंक दूं। क्यों..आखिर क्यों..ये दुनिया मेरी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। परेशान हूं। नहीं जानता क्या करूं। कभी-कभी सोचता हूं कि दुनिया को छोड़, खुद से कुछ उम्मीद कर लूं। फिर खयाल आता है कि नहीं, मैं आम आदमी हूं। मुझे सारी उम्मीदें दूसरों से ही करनी है। वैसे भी दुनिया को आग लगाना, आत्मदाह करने से कहीं ज्यादा आसान है!

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  • Web Title:जो ज्यादा आसान है!