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महापुरुषों पर मेहरबानी

आजकल उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती द्वारा दलित महापुरुषों के स्मारकों व मूर्तियों की स्थापना चर्चा का विषय बन गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील द्वारा डाली गई जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए मायावती से जवाब मांगा। लेकिन ऐसी जनहित याचिका इस देश में स्थापित स्मारकों व मूर्तियों के प्रचार-प्रसार पर हो रहे अरबों रुपए के खर्चे के विषय में शायद ही डाली गई होंगी। डॉ. अम्बेडकर व कांशीराम की मूर्ति मायावती ही क्यों लगवा रही हैं क्या डॉ. अम्बेडकर ने भारतीय संविधान केवल दलितों के लिए ही लिखा है, भारतीय गणतंत्र के लिए नहीं।
राजवीर सिंह, जगतपुरी, दिल्ली

ग्रेडिंग के बाद भी
सीबीएसई 10वीं में अंकों के स्थान पर ग्रेडिंग सिस्टम लाएगी जिसमें 90 प्रतिशत को ए ग्रेड दिया जाएगा फिर ए1 से ई तक अंकों के आधार पर ग्रेड फिक्स कर दिए जाएंगे। अभी लोग पूछते हैं कि कितने प्रतिशत अंक मिले हैं। फिर पूछेंगे कि कौन से ग्रेड में पास हुआ है। यदि सुधार ही करना है तो फेल विद्यार्थी को ऑन लाइन तथा ऑन डिमांड पेपर देने के विकल्प हों। 10वीं की परीक्षा प्राइवेट छात्रों के लिए भी जगह होनी चाहिए।
कृष्णकुमार वर्मा, गाजियाबाद,

नेमप्लेट ही काफी है
‘रंग महल’ कॉलम में नेमप्लेट का रोचक वर्णन है। नेमप्लेट से ही घर की पूरी तस्वीर सामने आ जाती है। जिस तरह हम खत के मजनून से खत की भाषा को समझ लेते हैं। सदियों से घरों की नेमप्लेटों पर गृहस्वामी के नाम के साथ-साथ डॉ., प्रो., एडवोकेट, बी.ए. जसे ओहदों से लेकर महत्वपूर्ण पदों का उल्लेख होता है। और आजकल तो नेमप्लेट वाहनों व कमीज-शर्ट के ऊपर भी लगाई जाती हैं। वाहन के मालिक को तो अध्यक्ष होना चाहिए चाहे वह रेजिडेंट वेलफेयर का हो या गली-मोहल्ले का नेता हो।
राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

फीस आगे या पढ़ाई
आश्चर्य होता है कि प्राइवेट स्कूल में भारी फीस देकर पढ़ने वाले चौथी  के बच्चे को सौ तक ठीक गिनती नहीं आती है। पहाड़ा का तो नाम भी नहीं जनता। समझ में नहीं आता कि स्कूल में क्या पढ़ाया जता है और कैसे अयोग्य बच्चों को पास करके अगली कक्षा में भेज देते हैं। यदि दसवीं की बोर्ड परीक्षा को समाप्त कर दिया गया तो शिक्षा का कोई महत्व शेष नहीं रहेगा। हजारों रुपये देकर स्कूल में झूठा प्रमाण-पत्र लेकर मैट्रिक पास हो जाएगा।
देवराज आर्यमित्र,  नई दिल्ली

भाजपा में बिखराव
लोकसभा चुनाव 2009 की हार के बाद भाजपा में एक बार फिर भूचाल आया है। पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। हार के कारणों की समीक्षा प्रकरण के बाद आडवाणी कमजोर हो गए हैं, पार्टी को चलाने के लिए एक मजबूत संगठन की आवश्यकता होती है, जो भाजपा में टूट गया है। भाजपा का यह बिखराव लोकतंत्र के लिए भी घातक है क्योंकि विपक्ष सशक्त हो तो ही लोकतंत्र मजबूत होता है।
युधिष्ठिर लाल कक्कड़, गुड़गांव

बजट
बजट की खासियत यह है
कि बगैर वाम के ‘आम’ सस्ते हैं।
अशोक, नई दिल्ली

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