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पीएम ने सराहा, विपक्ष ने नकारा

पीएम ने सराहा, विपक्ष ने नकारा

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दूसरे कार्यकाल के पहले आम बजट पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह बजट राष्ट्र के विकास की गति तेज करेगा तथा निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ाएगा।

उन्होंने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा आम बजट पेश किए जाने के बाद संवाददाताओं से कहा कि 7 प्रतिशत के सकल घरेलू उत्पाद की दर अपेक्षानुरूप नहीं है और इसे बढ़ाकर 8 से 9 प्रतिशत करने का हमारा लक्ष्य है जिसे आज पेश किए गए बजट के माध्यम से पूरा करने का सरकार का प्रयास है।

कांग्रेस नीत संप्रग तथा उसके सहयोगियों ने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के आम बजट को समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रख कर तैयार  किया गया विकासोन्मुखी संतुलित बजट बताया है जबकि भाजपा, वाम मोर्चा समेत विपक्षी दलों ने गांव, गरीब और आम लोगों से दूर इसे खटटा बजट करार दिया है।

संप्रग सरकार को समर्थन देने वाली समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह ने सांसद निधि को हटाए जाने की मांग करते हुए कहा कि इस बजट में ग्रामीण क्षेत्र और आम लोगों की उपेक्षा की गई है।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि प्रणव मुखर्जी द्वारा पेश केंद्रीय बजट अल्पावधि विकास मध्यावधि सुधार और दीर्घकालिक योजना का बुद्धिमतापूर्ण सममिश्रण है। वैश्विक आर्थिक मंदी के दबाव से उबरते हुए वित्त मंत्री ने सामाजिक क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया है और रोजगार पैदा करने के प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बजट में आम लोगों के साथ कॉरपोरेट क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि प्रणव मुखर्जी द्वारा पेश आम बजट किसी भी कसौटी पर खरा नहीं उतरा है। बजट के किसी भी खंड में वित्त मंत्री ने साहस नहीं दिखाया है और किसी बड़ी रियायत की घोषणा नहीं की है। उन्होंने कहा कि बजट में आधारभूत संरचना के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है और ऐसी कोई भी घोषणा नहीं की है जो आम लोगों के लिए है। हमें उम्मीद थी कि आवास ऋण पर छूट बढ़ेगी लेकिन ऐसा कुछ भी सामने नहीं आया।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि नए जनादेश के बाद पेश बजट को कुल मिलाकर अच्छा बजट कहा जा सकता है जिसमें आधारभूत संरचना के विकास तथा गरीब एवं आम लोगों की भलाई पर ध्यान दिया गया है। लालू ने कहा कि देश को वैश्विक आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ा। ऐसे समय में सेना के लिए समान पेंशन  महिलाओं आम लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए कर की सीमा में बढ़ोतरी अच्छा कदम है। उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष रार्ज्य का दर्जा प्रदान करने के लिए भी कुछ नहीं कहा गया। एक पिछड़े राज्य को भी विकास का मौका मिलना चाहिए।

भाकपा के गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि संप्रग सरकार के आम बजट में कुछ भी ऐसा नहीं है जिसका उल्लेख किया जा सके। खेती क्षेत्र में सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किये  हैं। वह एक दिवास्वप्न है। उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में जो प्रावधान किए गए हैं वह किसी भी मायने में वास्तविक नहीं लगता है। बजट में ग्रामीण क्षेत्र और आम लोगों के लिए कोई नई योजना नहीं है। योजनाओं में सरकार के बजटीय प्रावधान से गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को कोई लाभ नहीं होने जा रहा है।

सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने कहा कि प्रणव मुखर्जी ने आम लोगों के लिए खटटा बजट पेश किया है जिसमें गांव और गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है। यह किसान विरोधी बजट है जिसमें ठोस योजनाओं का सख्त अभाव है। राज्यसभा के सदस्य राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि बजट अनुमानों के अनुरूप ही है और सामाजिक परिव्यय की जो बात की गई है वह सहारहनीय है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर बजट को केयरफुल की संज्ञादी जा सकती है।

वहीं, केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख ने बजट को महाराष्ट्र के किसानों के लिहाज से बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा निजी ऋदाताओं से कर्ज की स्थिति की जांच के लिए पहली बार कार्यबल का गठन स्वागतयोग्य है और इससे किसानों का भला होगा।

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने बजट पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि इसमें खेती क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया है।

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि बजट को देश हित और वर्तमान चुनौतियों को ध्यान में रखकर पेश किया जाना चाहिए था लेकिन प्रणव मुखर्जी द्वारा पेश बजट में इसका अभाव दिख रहा है। केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि सभी लोगों को खुश नहीं किया जा सकता है लेकिन इस बजट में समाज के सभी वर्ग के लोगों का ध्यान रखा गया है।


भाकपा के डी राजा ने कहा कि इस बजट में कुछ भी खास नहीं है और इसमें नव उदारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। जद यू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि एक जगह पर कदम ताल करने वाला बजट है। सपा नेता जयाप्रदा ने कहा कि यह एक औसत बजट है जिसमें आंकड़ों से खेला गया है।

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि इस बजट में सरकार का अंतर्विरोध दिखाई देता है। सरकार आम लोगों के नारे पर चुनाव जीत कर आई है लेकिन बजट में नव उदारवाद को आगे बढ़ा रही है।

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