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रक्षा बजट में 36,103 करोड़ रुपये की भारी बढ़ोतरी

रक्षा बजट में 36,103 करोड़ रुपये की भारी बढ़ोतरी

सरकार ने 2009-10 के लिए रक्षा बजट आबंटन में 34 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर इसे 1,41,703 करोड़ रुपये कर दिया है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने 2009-10 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार रक्षा उपकरणों की खरीद में तेजी लाना चाहती है।

मुखर्जी ने 2009-10 के लिए रक्षा बजट के लिए आवंटन 1,41,703 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है, जो 2008-09 के 1,05,600 करोड़ रुपये की तुलना में 36,103 करोड़ रुपये ज्यादा है। सरकार ने कहा है कि वह रक्षा उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया में तेजी लाएगी और गत वर्ष 26 नवंबर को मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों से उजागर हुई सुरक्षा खामियों को दूर करना चाहती है।

रक्षा बजट में 34 प्रतिशत की वद्धि को अच्छी-खासी बढ़ोतरी माना जा रहा है। 2007-08 में रक्षा बजट 96,000 करोड़ रुपये था, जिसमें दस फीसद की वद्धि कर इसे 2008-09 में 1,05,600 करोड़ रुपये किया गया। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने लोकसभा चुनाव से पहले 16 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में भी रक्षा क्षेत्र के लिए इतने ही आबंटन का प्रस्ताव किया था।

रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी के बावजूद भारत का रक्षा खर्च अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। भारत का रक्षा खर्च जीडीपी का दो प्रतिशत है, जबकि चीन का रक्षा खर्च जीडीपी का सात प्रतिशत और पाकिस्तान का पांच प्रतिशत है।

रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल के खर्च नहीं हुई 7,000 करोड़ रुपये की राशि वापस की है। रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन में बढ़ोतरी पिछले साल मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों के मददेनजर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुंबई हमलों के बाद सरकार ने सुरक्षा बलों के लिए उपकरणों की खरीद की गति तेज करने का फैसला किया है।

रक्षा बलों ने अपने विशेष बलों के लिए खरीदे जाने वाले उपकरणों की लंबी-चौड़ी सूची पहले ही तैयार कर ली है। ये उपकरण खासकर कमांडो आदि को दिए जाएंगे। मुंबई हमलों के बाद सरकार ने देश के सुरक्षा ढांचे के पुनर्गठन की लंबी-चौड़ी प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत कोस्टल कमांड के गठन के अलावा समुद्री सुरक्षा का पूरा उत्तरदायित्व नौसेना को सौंपा जाना शामिल है।

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