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जहर देने पर आमादा व्यापारी

जहर देने पर आमादा व्यापारी
राजस्थान सरकार ने भोजन सामग्री में मिलावट को ढूंढ़ने और दोषी को दंडित करने का सराहनीय अभियान चलाया है। व्यापारियों को चाहिए तो यह था कि वे आगे बढ़ कर इस अभियान में मदद देकर जनता के स्वास्थ्य व धन की रक्षा करते। इसके विरुद्ध अधिकांश स्थानों पर व्यापारियों ने हड़तालें कीं। कई स्थानों पर हिंसक प्रतिरोध किया। जनता व्यापारियों से जानना चाहती है कि यदि उनका सामान शुद्ध है तो उन्हें डरने की और विरोध करने की क्या जरूरत है? यदि वे जनता को मिलावटी माल का जहर खिलाने के इच्छुक हैं तो जनता को भी इन परोक्ष मानव-हत्यारों के विरुद्ध लामबंद होना चाहिए। राजस्थान सरकार से अनुरोध है कि वे काम में बाधा डालने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करे और आम जनता का सहयोग ले। मेरा दृढ़ विश्वास है कि गहलोत जैसे ईमानदार मुख्यमंत्री जनता को मिलावट के जहर से मुक्ति जरूर दिलाएंगे।
सोहन सिंह भदौरिया, बीकानेर

मरवा दिया वकील ने
ऐसा वकील किस काम का, जो अपने ही मुवक्लिकल को मरवा कर ही दम ले। जी हां सरबजीत सिंह के मामले में तो ऐसा ही कुछ लगता है। पाकिस्तानी सुप्रीमकोर्ट में सरबजीत सिंह की फांसी के खिलाफ याचिका विचाराधीन थी तथा उस पर सुनवाई होनी थी, किन्तु वकील साहब कोर्ट में नहीं आए। लिहाज कोर्ट ने वह याचिका खारिज कर दी और सरबजीत सिंह की फांसी की सजा बहाल रखी। लगता है कि यह सारा मामला पूर्वनियोजित था। यह तो किसी को जबरन फांसी पर लटकाने जैसा है।
इंद्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली

कानून में संशोधन
जब कानून जनता, समाज और देश हित में न होकर इनके विकास और कल्याण में बाधक हो तब उस कानून में संशोधन या बदलाव आवश्यक होता है। समलैंगिकता कानून में संशोधन की बात भी कही जा रही है। इस कानून के बदलाव से अमानवीयता और अपराधों में बढ़ावा मिलने के सिवा कुछ हासिल न होगा।
इंदिरा सदावर्ती, राज गार्डन, नई दिल्ली

क्या लेकर आएगा बजट
आर्थिक मंदी के इस दौर में आम आदमी के लिए क्या लेकर आएगा आम बजट? नैनो जैसी कम दाम की कार आने से आम आदमी को कोई फर्क नहीं पड़ता। उसको तो रोटी, कपड़ा और मकान के दाम कम होने से मतलब है। देखना यह है कि वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी आम आदमी की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं। किसान भाइयों को उम्मीद है कि नई सरकार उनके लिए राहत पैकेज लेकर आएगी। अनुमान यह भी है कि गेहूं, चावल, दाल जैसी रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती होंगी।  क्या एलपीजी सस्ती होगी? क्या पेट्रोल डीजल सस्ते होंगे? जहां एक ओर खुशी होगी वहीं दूसरी ओर निराशा भी। अब इंतजार है तो आने वाले बजट का।
प्रियंका पाठक, ए.म.यू, अलीगढ़

गंदा पानी हमें क्यों?
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सभी स्कूलों को शुद्ध पेय जल मिलेगा। हम दिल्लीवासी तो बाकायदा जल बोर्ड को पानी का बिल भरते हैं, उसके बावजूद भी हमें गंदा और बदबूदार पानी क्यों सप्लाई होता है? इस पर मंत्रीजी का ध्यान क्यों नहीं है?
अशोक गुप्ता दाढ़ीवाला, दिल्ली

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