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रणवीर एनकाउंटर ने पुलिस को विलेन बना डाला

चित्रकूट का रियल एनकाउंटर पूरे देश ने देखा था। सैकड़ों पुलिसकर्मी और सामने एक अकेला डकैत। फिर भी मुठभेड़ दो दिन चली। कई पुलिसकर्मी मारे गए, तब कहीं एक डाकू का सफाया हुआ। पुलिस ने फिर एक एनकाउंटर किया है। एमबीए कर चुके एक सीधे-सादे नौजवान को अपनी बंदूकों का निशाना बना डाला। पुलिस चाहती तो घेराबंदी कर उसे जिंदा पकड़ सकती थी। गोली चलाने की नौबत भी थी तो पैर में गोली मारकर उसे जख्मी भी किया जा सकता था। मगर झूठी बहादुरी साबित करने के लिए वर्दीवाले फिर अपने दायरे लांघ गए। अब पूरे देश में बखेड़ा खड़ा हो गया है, तो वही पुलिस सिर छिपाती नजर आ रही है।


क्राइम कंट्रोल की आड़ लेकर पुलिस बेगुनाहों का शिकार न कर दे, इसलिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सुप्रिम कोर्ट ने बाकायदा लक्ष्मण रेखा खींच रखी है। पुलिस अफसर खुद भी मानते हैं कि बेवजह गोली चलाने की छूट पुलिस को है ही नहीं। अपराधियों की तलाश हो या रुटीन चैकिंग का काम, इसके लिए कभी एक पुलिसकर्मी को नहीं जुटाया जाता। इसके लिए पूरी एक टीम बनती है। यहां तक कि गश्त में भी किसी सिपाही और दरोगा को अकेला नहीं भेजा जाता। सिपाही जाता है, तो उसके साथ होमगार्ड होता है। यदि दरोगा की रवानगी होती है तो भी उसके साथ एक सिपाही या होमगार्ड रखा जाता है।


देहरादून पुलिस भले अपनी रटी-रटाई कहानी को साबित करने के लिए कुछ भी बोल रही है मगर परदे के पीछे का सच फिर भी नहीं छिपता दिखाई दे रहा। गाजियाबाद में इंदिरापुरम के रहने वाला एमबीए पासआउट रणवीर देहरादून के रास्तों से अंजान था। पुलिस के पास उसका कोई क्रिमिनल रिकार्ड भी नहीं, जो उसके अपराधी होने की पुष्टि हो सके।


जहां तक कथित मुठभेड़ का सवाल है, तो पुलिस ने रणवीर के सीने में गोली मारी है। निशानेबाजी में हमेशा फिसड्डी रहने वाले पुलिसकर्मियों ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, यह खुद में ही अचंभिति करने वाली बात है। फिर पुलिस चाहती तो रणवीर को बिना गोली चलाए भी घेर सकती थी। पुलिस के लिए यह लिखा-पढ़ी में बंदिश भी है कि जब तक अपनी जान पर बन आए वह गोली नहीं चला सकती। यह भी कायदा है कि जरूरत पड़ने पर पहले सामने वाले की कमर से नीचे गोली मारी जाए, ताकि जख्मी हालत में पकड़कर उससे पूछताछ की जा सकती। मगर नौकरी की तलाश में देहरादून गए रणवीर के साथ पुलिस ने ऐसा नहीं किया। उसे बेवजह मार डाला। अब पूरा देश पुलिस वालों से बेकसूर रणवीर की मौत का हिसाब मांग रहा है, तो अफसर बगलें झांक रहे हैं।

 

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