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सरकार की नई पहल से सड़क,शिक्षा,स्वास्थ्य पर जोर

बिहार में माओवादियों और नक्सलवादियों के  बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए पांच जिलों -जहानाबाद, औरंगाबाद, अरवल, गया और रोहतास में बहेगी विकास योजनाओं की बयार। देश के नौ राज्यों के 76 वाम उग्रवाद प्रभावित जिलों की विकास योजनाओं की रुपरेखा तैयार की ज रही है। नक्सली और माओवादियों से निबटने के लिए केंद्र ने नई पहल की है।


योजना आयोग के निर्देश पर बिहार के पांच जिलों के जिलाधिकारियों ने विकास योजना तैयार कराया है। इन जिलों में  ग्रामीण सड़कों, ग्रामीण विद्युतीकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया जाएगा। योजना आयोग ने वाम उग्रवाद प्रभावित जिलों के लिए विशेष योजना तैयार कराया है। पांच जिलों की योजनाओं को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली से एक अधिकारी पटना आएंगे।


सूत्रों ने बताया कि आयोग के निर्देश पर चार  जिलों के जिलाधिकारियों ने वाम उग्रवाद प्रभावित जिलों में विकास योजनाओं के लिए खाका तैयार कर भेज दिया है। सिर्फ अरवल से रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमरजीत सिन्हा ने राज्य के विकास आयुक्त को वाम उग्रवाद प्रभावित जिलों के विकास योजनाओं के संबंध में पत्र लिखा है और कहा है कि राज्य सरकार से विमर्श के बाद इसे लागू किया जएगा। 

योजना आयोग ने वाम उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में डी. बंधोपाध्याय के नेतृत्व में एक एक्सपर्ट टीम का गठन किया था। पिछले वर्ष एक्सपर्ट टीम की रिपोर्ट - ‘डेवलपमेंट चैलेंजेज इन एक्स्ट्रीज्म एफेक्टेड एरिया’ के आने के बाद केंद्र सरकार सक्रिय हुई। इस रिपोर्ट में नक्सल प्रभावित जिलों के आर्थिक-सामाजिक हालत के बारे में उल्लेख किया गया है। दिल्ली में पिछले वर्ष ही वाम उग्रवाद प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों की बैठक हुई थी। बिहार से वाम उग्रवाद प्रभावित पांच जिलों को रखा गया है जबकि सूबे में कुल 31 जिलों को वाम उग्रवाद प्रभावित माना गया है।

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