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जल माफियाओं की फैलता जाल

गर्मी में राजधानी में बढ़ते पेयजल संकट के बीच जल माफिया मालामाल हो रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक ये माफिया रोजना 1.5 से दो करोड़ रुपए की कमाई करते हैं। ये माफिया अवैध रूप से टच्यूब वेल से निकालकर टैंकरों में भरकर ऑन डिमांड सप्लाई करते हैं और एक टैंकर पानी के लिए 500 से 1500 रुपए चार्ज करते हैं।


राजधानी में बढ़ती आबादी और दिल्ली जल बोर्ड की ओर समुचित मात्रा में पानी की सप्लाई नहीं होने के कारण ये जल माफिया वर्षो से चांदी काट कर रहे हैं। माफियाओं द्वारा अवैध रूप से जमीन से पानी निकालने के कारण भूजल का स्तर भी प्रभावित हो रहा है।


दिल्ली में कुल मिलाकर 17 लाख पानी के रजिस्टर्ड कनेक्शन हैं। दिल्ली में पानी की मांग 950 एमजीडी है जबकि जल बोर्ड की ओर से 806 एमजीडी पानी की आपूर्ति की जाती है। इसमें से 20 फीसदी पानी का लॉस हो जाता है। जल बोर्ड की ओर से पानी की सप्लाई केवल नियमित इलाकों में ही की जाती है जबकि राजधानी की एक बड़ी आबादी नियमित इलाकों से बाहर रहती है।  अनधिकृत कालोनी, पुनर्वास कालोनी, लाल डोरा में बढ़ी हुई आबादी, व्यावसायिक उपयोग के लिए लोगों को माफियाओं के टैंकरों पर ही निर्भर होना होता है।


एक अनुमान के मुताबिक गर्मी में राजधानी में 4.5 करोड़ लीटर पानी की कमी हो जाती है। इस कमी को पूरा करने में माफियाओं का धंधा तेजी से चल निकलता है। दक्षिण व दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली में भूजल का स्तर सबसे नीचे 85 मीटर तक है। इन इलाकों में जमीन से सबसे अधिक पानी निकाला जाता है। महरौली, छत्तरपुर, संगम विहार, तुगलकाबाद इलाकों में जोरदार तरीके पानी का अवध खनन किया जा रहा है।

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