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काव्य, संगीत और राजनय की साधक

काव्य, संगीत और राजनय की साधक

यहां मैं जिन निरुपमा की बात करने जा रहा हूं, वे कुमार विकल की कविता की उदास निरुपमा नहीं हैं। विकल की निरुपमा दत्त और निरुपमा राव में एक समानता जरूर है। दोनों ही कवियित्री हैं। निरुपमा राव में कवियित्री की संवेदना और भावुकता दोनों है। लेकिन फैसले लेते वक्त वे उन पर काबू पा लेती हैं। उनका काम भी ऐसा ही है। भावना पर काबू न पायें तो बात ही न बने। वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की विदेश सचिव बनायी गई हैं। इस पद पर पहुंचने वाली वे देश की दूसरी महिला हैं। इस पद को संभालने से पहले वे चीन में राजदूत थीं। वे चीन जाने से पहले दुनिया को अपनी खरी-खरी सुना चुकी हैं बतौर विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता। वे विदेश मंत्रालय की पहली महिला प्रवक्ता थीं, जिन्होंने पाकिस्तान, नेपाल, अमेरिका और चीन के साथ हर फैसले वाले नाजुक मौके पर देश का पक्ष मजबूती से रखा, मुस्कुराते हुए, तनाव से मुक्त। विदेश सचिव शिवशंकर मेनन के 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने के बाद कार्यभार ग्रहण करने वाली निरुपमा राव भारतीय विदेश सेवा के बैच 1973 की वरिष्ठ अधिकारी हैं। छह दिसम्बर 1950 में जन्मी निरुपमा राव चीन के अलावा श्रीलंका व पेरू में भी भारत की राजदूत रह चुकी हैं। अपने कई दशकों के डिप्लोमेटिक जीवन में वे वॉशिंगटन तथा मॉस्को के अलावा अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं। निरुपमा राव ने महाराष्ट्र की मराठा यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए किया है। अंग्रेजी में ही वे कविताएं लिखती हैं। उनकी वाणी में कवियों वाला ओज और कोमलता है। कर्नाटक संगीत की भी मर्मज्ञ हैं। काव्य और संगीत का अदभुत सम्मिश्रण उनके व्यक्तित्व को उद्दात्त बनाता है। मुसीबतों में भी वे विचलित नहीं होती हैं। उनके पति सुधाकर राव भी भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं। निरुपमा राव के दो बेटे हैं। विदेश सचिव बनने के साथ ही निरुपमा राव के सामने कई बड़ी चुनौतियां मुंह बाये खड़ी हैं। बहुत कठिन है डगर पनघट की। भारत के पड़ोस में हाहाकार मचा हुआ है। पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश में अशांति है। चीन से भी संबंध उतार-चढ़ाव वाले हैं। उनकी पहली अग्निपरीक्षा भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर होने वाली है। दोनों देश के रिश्ते नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। एक तरफ मुंबई हमलों में पाकिस्तान ने कोई ठोस और भरोसेमंद कार्रवाई अभी तक नहीं की है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका की आड़ लेकर उसने भारत को वार्ता की मेज पर लाने के लिये कूटनीतिक चाल चलनी शुरू कर दी है। ऐसी ही और भी चुनौतियां उनके सामने हैं। वसे उनका लंबा कूटनीतिक अनुभव है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता के तौर पर वे अपना जलवा दिखा चुकी हैं। एक दिलचस्प बात निरुपमा राव की नियुक्ति को लेकर। कहा जा रहा है कि उनकी नियुक्ति में कर्नाटक कनेक्शन असरकारी रहा। कर्नाटक से आने वाले विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा से निरुपमा राव के पति सुधाकर राव जो कर्नाटक के मुख्य सचिव हैं की अच्छी मैत्री है। सुधाकर राव स्वयं भी कैबिनेट सचिव पद के दावेदार थे। वे खुद काबीना सचिव तो नहीं बने पर अपनी पत्नी को विदेश सचिव बनवाने में महत्वपूर्ण कारण बन गये। ऐसी चर्चा साउथ ब्लॉक के गलियारों में है। सच-झूठ जो भी हो, लेकिन इन बातों से भी ज्यादा खरी है यह बात कि निरुपमा राव एक सर्वथा योग्य और प्रतिभाशाली अधिकारी हैं।

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