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रील पर सवार, राजनीतिक रंग

रील पर सवार, राजनीतिक रंग

फिल्म न्यूयॉर्क की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि कैटरीना कैफ को अगली फिल्म राजनीति में लेकर कोई गलती नहीं की गई है। क्योंकि अब से पहले कैटरीना ग्लैमरस रोल करती आ रही थीं। उनके खाते में कॉमेडी और रोमांटिक फिल्में ही आती थीं। न्यूयॉर्क में उनके द्वारा निभाई गयी एक गंभीर भूमिका ने उनके लिए कई अन्य तरह के किरदारों के द्वार खोल दिये हैं। बेशक निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा ने कैट के इस टैलेंट को काफी पहले ही भांप लिया होगा, क्योंकि उनकी अगली फिल्म राजनीति में कैटरीना कैफ एक नॉन ग्लैमरस किरदार अदा कर रही हैं। खबर है कि इस फिल्म में कैट ने सोनिया गांधी की भूमिका अदा की है। राजनीति पर आधारित यह फिल्म बड़े सितारों के साथ बनाई जा रही है, जिसमें कैटरीना ने पूरी फिल्म के दौरान सूती साडि़यों का इस्तेमाल किया है? उन्होंने अपनी हिन्दी भी काफी सुधारी है। कैटरीना के अलावा इस फिल्म में अजय देवगन, नाना पाटेकर, रणबीर कपूर, मनोज वाजपेयी भी हैं। यानी भारीभरकम पॉलिटिकल पावर दिखाने के लिए प्रकाश झा ने दमदार कहानी के साथ हैवीवेट सितारे भी लिये हैं। जिस तरह से फिल्म की कहानी राजनीति पर आधारित बताई जा रही है, उस लिहाज से इसमें कैटरीना के साथ रणबीर कपूर का होना इस बात का सबूत है कि प्रकाश झा ने एक गंभीर फिल्म के साथ युवाओं को जोड़ने के लिए ऐसे चेहरे भी लिये हैं, जिनमे यूथ अपील हो। सूत्र बताते हैं कि इस फिल्म में कैटरीना और रणबीर के किरदार ऐसे हैं, जो इससे पहले कभी नहीं लिखे गये।

मौटे तौर पर कहा जाए तो जहां बॉलीवुड में कॉमेडी, रोमांटिक, आतंकवाद सरीखे विषयों पर नए-नए निर्देशकों के साथ प्रयोग किये जा रहे हैं, वहीं राजनीति जैसे विषय पर भी फोकस किया जा रहा है। एक बड़ी शुरुआत प्रकाश झा ने कर दी है। कहना गलत न होगा लेकिन पिछले दो-तीन सालों के दौरान हिट हुई फिल्में जैसे सरकार और सरकार राज की सफलता से उन्हें काफी बल मिला है। सटीक सोच के साथ एक दमदार कहानी के रूप में हिट हुए सरकार और उसके सीक्वल के बाद ऐसा प्रयास जरूर किया जाना चाहिये। इसी साल की शुरुआत में रिलीज हुई निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म गुलाल भी छात्र राजनीति से प्रेरित थी। इसके अलावा एक अन्य फिल्म राम गोपाल वर्मा भी बना रहे हैं, जिसमें विवेक ओबेराय हैं। रक्तचरित्र नामक यह फिल्म भी राजनीति पर आधारित बताई जा रही है।

बीते कुछ सालों में हजार ख्वाहिशें ऐसी सरीखी फिल्मों ने भी राजनीति के एक नए चेहरे को उजागर करने में काफी मदद की है। सुधीर मिश्रा की इस फिल्म से ही बॉलीवुड में शाइनी आहूजा का आगमन हुआ था। केके मेनन भी इसी फिल्म से चमके थे। इन फिल्मों पर पैसा भी काफी खर्च किया जा रहा है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पिछले दिनों जब कैटरीना कैफ भोपाल में राजनीति फिल्म की शूटिंग कर रही थीं तो एक रैली का दृश्य फिल्माया जाना था। इसके लिए हजारों की भीड़ इकट्ठा की गयी। किसी असली रैली की तरह पार्टी के झंडे, बैनर, जीप और न जाने क्या क्या तामझाम किये गये। कैट ने हिन्दी में एक स्पीच भी दी। यह शॉट अटैन्ड करने वाले अधिकतर लोगों को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि यहां किसी फिल्म की शूटिंग हो रही है, क्योंकि नजारा बिलकुल असली था और देश के विभिन्न हिस्सों में चुनाव प्रचार भी चल रहा था। ऐसे में कैट की एंट्री भी ऐसे हुई कि मानों कोई बड़ी पार्टी की चर्चित नेत्री आ रही हो। उन्होंने भीडम् के सामने हाथ हिलाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया और एक दमदार भाषण दिया। उनके बगल में खड़े नाना पाटेकर तो किसी बड़ी पार्टी के वरिष्ठ नेता की तरह लग रहे थे।

प्रकाश झा के कुशल निर्देशन में यह शॉट पूरा हुआ। आप कह सकते हैं कि किसी अन्य निर्देशक के मुकाबले उन्होंने इसे ज्यादा ठीक से पूरा किया, क्योंकि उन्हें राजनीति पर आधारित फिल्में बनाने का काफी अनुभव भी हैं। प्रकाश झा इससे पहले गंगाजल और अपहरण जैसी फिल्मों में राजनीति के अलग-अलग पहलुओं को दर्शा चुके हैं।  न केवल प्रकाश झा और अनुराग कश्यप, बल्कि कुछ साल पहले मधुर भंडारकर भी एक महिला को केन्द्र में रखकर सत्ता जैसी दमदार फिल्म बना चुके हैं।

चुनावी मैदान में फिल्मी सितारों का उतरना अब कोई नई बात नहीं रही। बीते लोकसभा चुनावों में कई फिल्मी सितारों ने अपनी किस्मत आजमाई। पर फिल्मों में जिस तरह से राजनीति से प्रेरित विषय लिये जा रहे हैं, उसे ट्रेंड के रूप में काफी अहम माना जा रहा है। बड़े सितारे, बड़े प्रोडक्शन हाउस ऐसी फिल्मों के निर्माण में जुटे हैं, जो राजनीतिक विषयों पर आधारित हैं। साल की शुरुआत में आयी फिल्म गुलाल और कैटरीना कैफ की अगली फिल्म राजनीति दो बड़े उदाहरण हैं।

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