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पाक एटमी हथियारों को अंदरुनी खतरा

पाक एटमी हथियारों को अंदरुनी खतरा

अमेरिका के एक पूर्व खुफिया अधिकारी ने कहा है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को देश के अंदरुनी लोगों से ही खतरा है, जिनकी बाहर वालों से भी सांठगांठ हो सकती है, क्योंकि देश के अधिकारियों का ऐसे खतरों को विफल करने का खराब रिकॉर्ड है।

सीआईए को 23 वर्षों तक अपनी सेवाएं देने वाले रोल्फ मोवाट-लारेसन ने कहा  परमाणु हथियारों को सबसे बड़ा खतरा अंदरुनी लोगों से है, जो बाहर वालों के साथ मिल कर काम कर रहे हैं, ऐसे लोग जिन्हें बम या बम बनाने के सामान की जरूरत है।

मोवाट-लारेसन ने आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित की जाने वाली आर्म्स कंट्रोल टुडे के जुलाई-अगस्त अंक में कहा है कि  दुनिया में कहीं इतना खतरा नहीं है, जितना पाकिस्तान में है। पाकिस्तानी अधिकारियों का अंदरुनी खतरों को विफल करने का खराब रिकार्ड है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जहां तक हमारी जानकारी है पाकिस्तान बमों के जनक अब्दुल कदीर खान द्वारा संचालित नेटवर्क 2003 के पहले कई सालों तक परमाणु तकनीक को ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया पहुंचाता रहा। पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक द्वारा संस्थापित उम्मा-तमीर-ए-नाउ (यूटीएन) के अलकायदा और तालिबान से गहरे संबंध हैं। यूटीएन का मुखिया सुल्तान बशीरूद्दीन पाकिस्तान के खुशाब रिएक्टर का प्रभारी रह चुका है।

मोवाट-लारेसन ने कहा यह स्तब्ध करने वाली बात है कि पाकिस्तान के हथियार कार्यक्रम के जनकों में से दो लोग अपने लाभ के लिए देश के सबसे गोपनीय दस्तावेजों को बेचने के लिए जाल फैला रहे हैं। मोवाट-लारेसन ने कहा है खान और यूटीएन के मामले में, वरिष्ठ अधिकारी और उनके दस्ते के लोग पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों द्वारा पकड़े नहीं गए। यह मानना मूर्खता होगी कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। उन्होंने कहा पाकिस्तानी सेना, खुफिया अधिकारी और परमाणु हथियारों से जुड़े लोग देश के भीतर के खतरे का प्रतिरोध करने के लिए सक्षम नहीं हैं।

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